खेलने-कूदने की उम्र में बेटी भगवान के घर चली गई। आखिर उसका गुनाह क्या था, जो उसे इतनी दर्दनाक सजा मिली। हत्या की शिकार हो चुकी पौने चार साल की बच्ची में माता-पिता बेटे का रूप देखते थे।
बच्ची की दो बड़ी बहन हैं और वे यूपी के आजमगढ़ में दादा-दादी के साथ रहती हैं। पीड़ित माता-पिता के सगे संबधियों ने बताया कि जब उनकी तीसरी बच्ची गर्भ में थी तो वे उम्मीद कर रहे थे कि दो बेटियों के बाद अब बेटा होगा, लेकिन ऊपर वाले को कुछ और ही मंजूर था। उन्होंने फिर से घर में लक्ष्मी के रूप में बेटी को भेजा। वह काफी चुलबुली थी और उसने अभी स्कूल जाना शुरू किया था।
आसपास की महिलाओं ने बताया था कि जब उसकी मां किचन में काम करती थी तो वह साथ ही रहती थी। मां जो भी सामान मंगवाती थी, वह उसे दौड़ कर ले आती। वह अपने दादा-दादी की भी लाडली थी। पड़ोसियों ने बताया कि वह काफी तेज थी। उसे कोई भी बात सिखाता था तो वह झट से उसे समझ लेती थी। दोबारा उसे समझाने की जरूरत नहीं पड़ती थी।