जिंदगी में कुछ अलग करने की दृढ़ इच्छा रखने वाले अपना मुकाम हासिल कर ही लेते हैं। कुछ इसी तरह की मिसाल है, मोहाली के लालडू स्थित यूनिवर्सल ग्रुप के चेयरमैन गुरप्रीत सिंह। दिन रात मेहनत और कुछ नया करने की नई सोच ने गुरप्रीत सिंह को केवल 29 साल की उम्र में एजूकेशनल इंस्टीट्यूट के चेयरमैन की कुर्सी तक पहुंचा दिया।
126 स्टूडेंट्स से इंस्टीट्यूट शुरू करने वाले गुरप्रीत के विभिन्न एजूकेशनल कालेज में 2500 से अधिक विद्यार्थी बेहतर कैरियर के लिए विभिन्न कोर्स की पढ़ाई कर रहे हैं। केवल पांच सालों में डा.गुरप्रीत ने केवल 5 सालों में ही ट्राइसिटी के टॉप एजूकेशनल इंस्टीट्यूट में शामिल करवाया है।
गांव के स्कूल की क्लास से लेक्चरर बनने का सफर
गुरप्रीत सिंह का जन्म हरियाणा के फतेहाबाद में रतिया तहसील के गांव अहरवां में हुआ। पिता खेतीबाड़ी से जुड़े थे। घर में सुविधाएं नाममात्र थी। शुरूआती दौर की पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से हुई। आर्थिक तंगी में पढ़ाई के साथ खेती में पिता का हाथ भी बटाया।
पढ़ने की ललक और प्रतिभा को देखते हुए परिवार ने आर्थिक तंगी के बावजूद गुरप्रीत को फतेहाबाद के मनोहर मेमोरियल कालेज से बीए और फिर बीएड की पढ़ाई की। दोस्तों और शिक्षकों ने गुरप्रीत के मन में टीचिंग फील्ड ज्वाइन करने का जुनून भर दिया। अबोहर के डीएवी कालेज से एमएड की पढ़ाई पूरी की। लेक्चरर की नौकरी मिलने के बाद भी गुरप्रीत ने दिन रात मेहनत कर पहले एमफिल और फिर पीएचडी की डिग्री हासिल की है।
पहले नौकरी के लिए चक्कर, अब खुद दे रहे नौकरी
गुरप्रीत ने कालेज स्तर से ही लेक्चरर बनने का सपना देखा था। एमएड करने के बाद उन्होंने पंजाब के चुन्नी कलां (फतेहगढ़साहिब) स्थित पंजाब कालेज ऑफ एजूकेशन में लेक्चरर की स्थायी नौकरी मिल गई। 15 महीने कच्ची नौकरी के बाद गुरप्रीत को कैरियर में स्थिरता नहीं दिखी। उस समय एजूकेशन फील्ड में काफी नए लोग आ रहे थे। ऐसे में बड़ा रिस्क लेते हुए गुरप्रीत ने लेक्चरर की नौकरी छोड़ी दी और खुद का एजूकेशनल इंस्टीट्यूट स्थापित करने का फैसला लिया। डा.गुरप्रीत के विभिन्न कालेज में 200 के करीब लेक्चर और प्रोफेसर को नौकरी दी गई है।
डिस्टेशन एजूकेशन सेंटर से यूनिवर्सल ग्रुप तक का सफर
लेक्चरर की नौकरी छोड़ गुरप्रीत ने सेक्टर-38 में रीजनल इंस्टीट्यूट आऍफ डिस्टेंस एजूकेशन(आरआईडीई) की शुरूआत की। शुरूआत में कुल 190 स्टूडेंट ने सेंटर में दाखिला लिया। धीरे धीरे इंस्टीट्यूट से अच्छा रिस्पांस आने लगा। चंद सालों में स्टूडेंट की संख्या 1100 से अधिक हो गई।
डा.गुरप्रीत ने बताया कि 2009 में उन्होंने मोहाली के पास लालडू में 19 एकड़ जमीन खरीद कर यूनिवर्सल ग्रुप की नींव रखी। उन्होंने दिनरात खुद साइट पर खड़े होकर 5 महीनों में बिल्डिंग को तैयार कर अकादमिक सत्र शुरू करवाया। शुरूआत में कालेज में 126 स्टूडेंट ने दाखिला लिया, लेकिन अगले साल स्टूडेंट की संख्या 1400 तक पहुंच गई।
यूनिवर्सल ग्रुप में आज एमबीए, इंजीनियरिंग, नर्सिंग, एजूकेशन, पालिटेक्निक, मैनेजमेंट सहित 8 विभिन्न कालेज में 2500 से अधिक स्टूडेंट पढ़ रहे हैं। गुरप्रीत बताते हैं कि उन्होंने एजूकेशन इंस्टीट्यूट कभी भी पैसा कमाने के लिए नहीं खोले। बचपन में पढ़ाई के लिए खाए धक्कों ने उन्हें समाज को शिक्षित करने की प्रेरणा दी।
गरीब बच्चों के लिए 1 करोड़ की स्कॉलरशिप
डा.गुरप्रीत कहते हैं कि उन्होंने जिंदगी में पैसे की तंगी को देखा है। उन्होंने बताया कि यूनिवर्सल ग्रुप के सभी कालेज गरीब बच्चों की पढ़ाई में मदद कर सकें। उन्होंने बताया कि यूनिवर्सल ग्रुप हर कोर्स में 5 से 10 फीसदी बच्चों को फ्री एजूकेशन देते हैं। अगले सत्र के लिए विद्यार्थियों को करीब एक करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप दी जाएगी। उन्होंने कहा कि गरीब और होनहारों बच्चों के दाखिले का खर्च वह खुद देने के लिए तैयार हैं।