यूटी प्रशासन में एजुकेशन डिपार्टमेंट के अपने ही लोग विभाग का बंटाधार करने में जुटे हैं। शिक्षकों के ट्रांसफर को लेकर बन रही पॉलिसी लागू होने से पहले ही लीक कर दी गई। इसके बाद पॉलिसी का विरोध होना शुरू हो गया है। विरोध उग्र न हो जाए, इसे देखते हुए प्रशासन बैकफुट पर आ गया है। प्रशासन के निर्देश पर विभाग ने अभी फिलहॉल ट्रांसफर पॉलिसी पर काम करना बंद कर दिया है।
शिक्षा विभाग के पास टीचर ट्रांसफर को लेकर कोई अपनी कोई कारगर पॉलिसी नहीं है। हैरान कर देने वाली बात यह है कि इस पर यूटी प्रशासन की ओर से कभी कोई ठोस पहल भी नहीं हुई। अब जब विभाग ने ट्रांसफर पॉलिसी पर काम करना शुरू किया है, तो विभाग के लोगों ने इस पॉलिसी को लीक कर दिया। पॉलिसी लीक होने के बाद इसका विरोध शुरू हो गया।
कई शिक्षक संगठन धरना प्रदर्शन तक करने की बात कह रहे हैं। प्रशासन के आलाधिकारियों को आशंका है कि पॉलिसी को लेकर शिक्षक संगठन कहीं उग्र न हो जाएं, इसे लेकर अभी ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
डिपार्टमेंट पॉलिसी लीक होने पर कर रहा मंथन
टीचर ट्रांसफर पॉलिसी कैसे लीक हुई की, इसे लेकर विभागीय अफसर भी हैरान परेशान हैं। पूरे मामले को लेकर मंगलवार को एजूकेशन सेक्रेटरी ने एक इमरजेंसी मीटिंग भी बुलाई, जिसमें यह जानने की कोशिश हुई कि आखिर विभाग की सिक्रेट सूचनाएं बाहर तक कैसे पहुंच रही हैं। बताया जा रहा है कि विभाग की ओर से पूरे मामले की जांच पड़ताल के लिए एक कमेटी भी बनाई गई है।
पिक एंड चूज की नीति पर हो रहा तबादला
यूटी प्रशासन में ट्रांसफर को लेकर शिक्षकों को पिक एंड चूज की नीति अपनाई जा रही है। इस आधार पर ही शिक्षकों का तबादला समय-समय पर होता रहता है। इस नीति के तहत विभाग पर शिक्षकों के तबादले का बड़ा दबाव रहता है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि शिक्षक मनमर्जी से हर साल अपना ट्रांसफर करवा लेते हैं।
इसलिए हुआ विरोध
शिक्षा विभाग पहली बार शिक्षकों केलिए एक स्थानांतरण पॉलिसी बनाने की प्रक्रिया में है, इस पर प्रारंभिक जानकारी से पता चलता है कि शिक्षकों को उनके कैडर के आधार पर निर्धारित अवधि के बाद एक स्कूल से दूसरे स्कूल में स्थानांतरित किया जाएगा। इस पॉलिसी के तहत प्रधानाचार्यों और प्रधानाध्यापकों को हर सात से पांच साल के बाद, हर 10 साल के बाद लेक्चरर और 12 साल के बाद अन्य शिक्षकों को स्थानांतरित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
इस हस्तांतरण नीति को यूटी प्रशासन के उच्च अधिकारियों के अनुमोदन के लिए भेजा जाना है। इस पॉलिसी के लागू होने के बाद शिक्षकों को कम से कम पांच से सात साल तक एक ही स्कूल में रहना पड़ता है। इस खबर के लीक होते ही विरोध के स्वर मुखर हो गए। यह नीति सभी शिक्षण संवर्ग पदों पर जैसे प्रिंसिपल, हेडमास्टर, लेक्चरर, परास्नातक, व्यावसायिक शिक्षक और जेबीटी पर लागू होनी थी।
ऐसे में जरूरी है ट्रांसफर पॉलिसी
सैकड़ों शिक्षक 10 साल से अधिक समय से एक ही सरकारी स्कूल में जमे हैं, वहीं कुछ मामलों में 20 साल से भी अधिक समय से एक ही स्कूल में शिक्षक तैनात रहे हैं। ये शिक्षक एक ही स्कूल में तैनात होने के चलते स्थानीय राजनीति में संलिप्त रहते हैं और स्कूल के शैक्षणिक माहौल में बाधा डालते हैं। ऐसे में बेहतर प्रदर्शन करने वाले शिक्षक, जो बेहतर परिणाम के लिए एक स्कूल में काम करते हैं, उन्हें दूसरे स्कूलों में भेजा जाना चाहिए। इससे यूटी के सरकारी स्कूलों में ग्रामीण-शहरी क्षेत्र की स्थितियों पर भी नियंत्रण किया जा सकेगा।