ग्रहण का सूतक
- ग्रहण का सूतक 25 अक्तूबर को सूर्योदय से पूर्व रात्रि में दो बजकर 30 मिनट से आरंभ हो जाएगा।
ग्रहण काल में क्या करें और क्या न करें
ग्रहण के सूतक और ग्रहण काल में स्नान, दान, जप, पाठ, तीर्थ स्थान में स्नान और हवन करना कल्याणकारी होता है। जब ग्रहण आरंभ हो तो स्नान, जप और मध्यकाल में हवन, देव पूजा और समाप्त होने पर स्नान करना चाहिए। पका हुआ अन्न और कटी हुई सब्जी ग्रहण काल में दूषित हो जाता है, इसलिए इन्हें नहीं खाना चाहिए। ग्रहण काल में गर्भवती स्त्रियों को सोना, खाना-पीना निषेध है।
सूतक विचार...
सूर्य ग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले प्रारंभ हो जाता है इसलिए 24 तारीख की रात्रि में ही यह सूतक प्रारंभ हो जाएगा। सूतक काल में भगवान की मूर्ति का दर्शन करना, स्पर्श करना वर्जित माना गया है। इसलिए सनातन धर्म के सभी मंदिर 25 अक्तूबर को शाम साढ़े छह बजे तक बंद रहेंगे। स्नान संध्या आदि करने के बाद ही मंदिर के कपाट खुलेंगे।
गोवर्धन पूजा 26 को
देवालय पूजक परिषद चंडीगढ़ के संरक्षक आचार्य ईश्वर चंद्र शास्त्री व सेक्टर 18 के श्रीराधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ लाल बहादुर दुबे ने बताया कि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट का पर्व मनाया जाता है। 26 अक्तूबर को यह पर्व मनाया जाएगा। 26 अक्टूबर को सूर्योदय व्यापिनी प्रतिपदा है।
इस दिन गाय व श्री कृष्ण की पूजा की जाती है। इसी दिन भगवान कृष्ण ने ब्रजवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन को अपने हाथ पर धारण किया था। तब से परंपरा की गोवर्धन की पूजा की जाती है। इस दिन 56 प्रकार के पकवान बनाकर भगवान को भोग लगाया जाता है। गोवर्धन पूजा के दिन गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाया जाता है। इसे फूलों से सजाया जाता है। इसकी पूजा के बाद सात परिक्रमा लगाई जाती है। इसी दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा का आयोजन भी किया जाता है। कारखानों में मशीनों की पूजा की जाती है।