पंजाब के मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के मामले में भाजपा नेताओं की ओर से लगाई गई याचिका को जिला अदालत ने खारिज कर दिया है। 15 भाजपा नेताओं ने जिला अदालत में याचिका लगाकर खुद को आरोपमुक्त करने की गुहार लगाई थी। इनकी आरोपमुक्त करने संबंधी तीन अर्जियों को चीफ जूडीशियल मजिस्ट्रेट (सीजेएम) डॉ. अमन इंद्र सिंह ने रद्द कर दिया है। अब इनके खिलाफ केस जारी रहेगा।
21 अगस्त 2020 को 15 भाजपा नेताओं के खिलाफ आईपीसी की धारा 188 के तहत केस दर्ज किया गया था। इसमें तीक्ष्ण सूद, अरविंद मित्तल, मदन मोहन मित्तल, विजय सांपला, अरुण नारंग, मास्टर मोहन लाल, मनोरंजन कालिया, डॉ. बलदेव चावला, अश्वनी कुमार, तरुण चुघ, सुरजीत कुमार ज्याणी, केडी भंडारी, अरुणेश शकर, सुभाष शर्मा, मलविंदर सिंह कंग और जीवन गुप्ता का नाम शामिल है। मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने जा रहे नेताओं की पुलिस के साथ झड़प भी हुई थी। इस मामले में पुलिस के अलावा तत्कालीन डीसी मनदीप सिंह बराड़ ने भी शिकायत दी थी।
याचिका में बोले भाजपा नेता, इस धारा में नहीं दर्ज हो सकती एफआईआर
जिला अदालत में लगाई गई याचिका में भाजपा नेताओं ने कहा है कि धारा 188 से जुड़े अपराध के तहत कोई एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती। सीआरपीसी की धारा 195 के अनुसार कोई अदालत धारा 172 से लेकर 188 तक किसी अपराध पर संज्ञान नहीं लेगी और न किसी पब्लिक सर्वेंट की शिकायत हो सकती है।
नेताओं ने इसमें कुछ पुराने आदेश का हवाला भी दिया है। जिला अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा कि इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 के तहत बिजली चोरी का एक मामला था। सीआरपीसी के तहत उस केस में संज्ञेय अपराध था। मार्च 2006 में इस मामले में केस दर्ज किया गया। जून 2006 में इसका चालान पेश हुआ था। कोर्ट ने मामले में संज्ञान लिया था। उस केस में भी आरोपियों ने एफआईआर के आधार पर कोर्ट द्वारा संज्ञान लेने को चुनौती दी थी।
सुप्रीम कोर्ट के इन आदेशों को बनाया अदालत ने आधार
जिला अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के दो आदेशों को आधार बनाया। सीजेएम कोर्ट ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 195 एफआईआर दर्ज करने पर कोई रोक नहीं लगाती है। जब धारा 188 के तहत कोई अपराध किया गया हो जो गंभीर अपराध की श्रेणी में आता हो तो ऐसे केस में पुलिस जांच पर सीआरपीसी की धारा 173 के तहत चालान पेश कर सकती है और कोर्ट उस पर संज्ञान ले सकता है। दूसरे रूप में यदि कोर्ट को सीधे शिकायत दी जाती है तो भी कोर्ट संज्ञान ले सकता है।