चंडीगढ़। यूटी प्रशासन ने शनिवार को शहर के सभी निजी अस्पतालों के लिए तय ऑक्सीजन के कोटे और एजेंसी की बाध्यता को खत्म कर दिया है। अब कोई भी अस्पताल किसी भी ऑक्सीजन रिफिलिंग एजेंसी से जितने मर्जी ऑक्सीजन सिलिंडर भरवा सकता है। हालांकि, प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि अगर उन्हें शिकायत मिलेगी तो फिर वह कोटा को लागू कर देंगे।
ऑक्सीजन की अचानक बढ़ी खपत को देखते हुए ऑक्सीजन सप्लाई के नोडल अधिकारी यशपाल गर्ग ने 11 मई को शहर के सभी निजी अस्पतालों के लिए ऑक्सीजन का कोटा तय कर दिया था। इसके अलावा यह भी तय किया था कि कौन सा अस्पताल, किस रिफिलिंग एजेंसी से गैस भरवाएगा। कुछ निजी अस्पतालों में जरूरत से ज्यादा ऑक्सीजन की खपत हो रही थी, जिसके बाद कोटा तय करने का फैसला लिया गया था। कोटा खत्म करने का आदेश शनिवार को यशपाल गर्ग की तरफ से जारी किया गया है। उन्होंने आदेश में लिखा है कि सभी निजी अस्पतालों को रोजाना बेड की उपलब्धता और ऑक्सीजन खपत की जानकारी प्रशासन को देनी होगी। प्रशासन की तरफ से कभी भी अस्पताल की जांच की जा सकती है। इसके अलावा अगर किसी अस्पताल से जमाखोरी व जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल की शिकायत मिली तो संबंधित अस्पताल पर कार्रवाई करने के साथ ही एक बार फिर से पुराने कोटा की व्यवस्था को लागू कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा है कि प्रशासन ने डी और बी-टाइप सिलिंडर भराने के लिए दाम तय किए हुए हैं। ऐसे में किसी भी निजी अस्पताल को अगर तीनों रिफिलिंग गैस एजेंसी से सस्ते दाम पर गैस मिलती है तो वह भरवा सकते हैं। सिर्फ अस्पतालों को ही नहीं, बल्कि निजी गैस रिफिलिंग एजेंसी को भी रोजाना बताना होगा कि उन्होंने किन अस्पतालों को ऑक्सीजन दी है, कितने सिलिंडर भरे हैं और उसके एवज में कितने रुपये लिए हैं। यशपाल गर्ग ने कहा कि शहर में अब पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन उपलब्ध है, इसलिए कोटा व्यवस्था को खत्म किया गया है। हालांकि, समय-समय पर अस्पतालों की जांच की जाएगी।