चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल एंड टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (सिटको) पिछले कई दशकों से होटल माउंट व्यू और पार्क व्यू में लॉन्ड्री का काम कर रही कंपनी लिली व्हाइट पर मेहरबान है। सिटको ने फरवरी 2019 में इसी कंपनी का टेंडर यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि ये होटलों की आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर रही। हैरत की बात है टेंडर रद्द करने के बाद भी पिछले साढ़े चार साल से इसी कंपनी से काम कराया जा रहा है। इससे पहले भी करीब 33 साल इसी कंपनी ने सिटको में काम किया है।
सिटको में मिलीभगत और सांठगांठ का यह पहला मामला नहीं है, लेकिन यह अपने आप में काफी अलग है। सिटको ने 18 दिसंबर 2018 को सेक्टर-10 स्थित होटल माउंटव्यू और सेक्टर-24 स्थित होटल पार्क व्यू में लॉन्ड्री का काम सेक्टर-10डी की एक कंपनी को सौंपा। आरोप लगे कि कंपनी शर्तों को पूरा ही नहीं करती फिर भी टेंडर दे दिया गया। इस पर जांच हुई और आरोप सही पाए गए।
यह भी पढ़ें: Punjab News: पंजाब में 4 की मौत, उज्ज दरिया में उफान, पठानकोट और गुरदासपुर के स्कूलों में छुट्टी
दो महीने में ही सिटको ने 12 फरवरी 2019 को तत्काल प्रभाव से टेंडर रद्द कर दिया लेकिन आदेश में यह भी लिख दिया कि जब तक नया टेंडर नहीं होगा, यही कंपनी काम करती रहेगी। यह आदेश फरवरी 2019 का था और अब जुलाई 2023 चल रहा है। अब तक यही कंपनी काम कर रही है।
पिछले साढ़े चार साल में दो-तीन बार सिटको ने टेंडर भी किए, लेकिन सूत्रों का कहना है कि ये टेंडर भी सिर्फ अधिकारियों को जवाब देने और लोगों की आंखों में धूल झोंकने के लिए थे। सिटको के कई कर्मचारियों पर कंपनी को फायदा पहुंचाने का आरोप लग रहा है। बता दें कि दोनों होटल का हर महीने कुल करीब छह से सात लाख रुपये का लॉन्ड्री का काम होता है।
खराब गुणवत्ता की कई शिकायतों के बाद भी दबदबा
सिटको के अधिकारी कंपनी पर इस कदर मेहरबान हैं कि काम में गलती और खराब गुणवत्ता के काम की दर्जनों शिकायतों के बाद भी कंपनी का दबदबा बरकरार है। होटल माउंट व्यू और पार्क व्यू ने कई बार कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया। माउंट व्यू ने 31 मई 2019 को करीब 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। लिखित में कहा कि गेस्ट शिकायत कर रहे हैं। वॉशिंग के दौरान बेडशीट फट गई।
स्टाफ की यूनिफॉर्म ठीक से साफ नहीं की जा रही। होटल का नाम खराब हो रहा है। इसके बाद भी कई बार शिकायतें हुईं लेकिन कंपनी पर कोई असर नहीं पड़ा, न सिटको ने कंपनी को बदलने में कोई रुचि दिखाई। सूत्रों का कहना है कि ठेकेदार का सिटको में इतना ज्यादा दबदबा है कि कर्मचारियों के साथ अधिकारी भी साथ देते हैं इसलिए ही बिना टेंडर साढ़े चार साल से काम चल रहा है।
पिछले करीब एक साल से नहीं हुआ नया टेंडर
दोनों होटल की लॉन्ड्री के लिए सिटको ने पिछले करीब एक साल से कोई नया टेंडर नहीं किया। अब तक जो टेंडर किए गए हैं, वो महज खानापूर्ति होती है। सूत्रों का कहना है कि टेंडर में ऐसी शर्ते जोड़ दी जाती हैं, जिससे टेंडर कभी पूरा ही नहीं होता। कई बार तकनीकी बोली खोलने के बाद वित्तीय बोली नहीं खोली जाती। इन पैंतरों से ही पिछले साढ़े चार साल से बिना टेंडर उसी कंपनी से काम कराया जा रहा है अन्यथा पिछले एक से दो साल में शहर के दो बड़े सरकारी अस्पतालों ने लॉन्ड्री का टेंडर किया और उन्हें कंपनियां भी मिल गईं। फिर ऐसा क्यों है कि सिटको को ही नए ठेकेदार नहीं मिल रहे हैं।
मेरे संज्ञान में मामला आया है। पहले कुछ टेंडर किए गए थे, लेकिन उसमें अधिक कंपनियों ने हिस्सा नहीं लिया जिसकी वजह से टेंडर पूरा नहीं हुआ। हालांकि, अब मैंने सिटको के अधिकारियों को स्पष्ट आदेश दिए हैं। पहले जैसी स्थिति न बने इसके लिए इस बार पहले प्री-बिड बैठक बुलाएंगे।
- नितिन यादव, चेयरमैन, सिटको