प्याज, टमाटर और मटर के रेट लगातार बढ़ रहे हैं जिसने लोगों की रसोई का बजट हिला दिया है। सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि अभी इस माह इनके रेट कम होने की उम्मीद नहीं है। प्याज नासिक से आ रहा है। अलवर से जो प्याज आ रहा है वह गीला है।
मटर 100 रुपये किलो में बिक रहा है। इसके बावजूद लोकल सब्जियां आ गई हैं उनके रेट जरूर कम हैं, लेकिन कोई भी सब्जी ऐसी नहीं है जो प्याज और टमाटर के बिना बनती हो। इस समय बाजार में परचून में टमाटर 60 से 70 रुपये किलो में बिक रहा है, जबकि दो सप्ताह पहले तो इसके रेट 80 रुपये किलो तक भी पहुंच गए थे।
इस समय पहाड़ी टमाटर ही आ रहा है। सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि नासिक में पिछले दिनों बारिश होने के कारण प्याज की फसल खराब हो गई जिस कारण रेट बढ़ गए, जबकि पहाड़ी आलू के रेट भी बढ़े हैं। एक सप्ताह पहले 20 रुपये किलो बिकने वाला आलू 30 रुपये पहुंच गया है। नासिक से आने वाला प्याज 40 रुपये किलो परचून में बिक रहा है।
शिमला मिर्च लोकल शुरू हो गई हे बावजूद इसके बावजूद रेट 50 रुपये किलो है। बींस की कीमत 50 रुपये किलो है। एक सप्ताह पहले इसकी कीमत 60 रुपये किलो थी। बैगन 30 रुपये किलो में बिक रहा है। लोकल सब्जी में पालक, शलगम, गोभी और मूली मैथी, साग का पत्ता भी आना शुरू हो गया है।
सेक्टर-23 में अरोड़ा वेजिटेबल शाप के संचालक विनोद कुमार उर्फ काका का कहना है कि टमाटर, मटर और प्याज के रेट ही बढ़ रहे हैं। अलवर से जब फसल खुलकर आनी शुरू हो जाएगी तो इनके रेट कम होंगे जबकि लोकल मटर की सप्लाई आने पर इनके रेट भी कम होंगे।
स्मॉल वेजिटेबल सेलर एसोसिएशन के अध्यक्ष देसराज का कहना है कि टमाटर और प्याज के रेट पिछले एक माह से बढ़ रहे हैं। दिसंबर में रेट कम होने की उम्मीद है। लोकल सब्जियां आनी शुरू हो गईं, लेकिन इनके रेट में अगले दिनों में और गिरावट आएगी।