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एसएससी के पूर्व उप महानिदेशक समेत दो आरोपी दस साल बाद दोषी करार, 10 बरी

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चंडीगढ़। अर्द्धसैनिक बल में एएसआई पद की लिखित परीक्षा में गड़बड़ी के मामले में 10 साल बाद सेक्टर-9 केंद्रीय सदन स्थित कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) के पूर्व क्षेत्रीय उप निदेशक नवीन सहगल और सीनियर ऑडिटर सतीश अहलावत को सीबीआई जज सुशील कुमार गर्ग की अदालत ने बुधवार को दोषी करार दिया। अदालत ने सजा पर फैसला शुक्रवार तक सुरक्षित रख लिया है। इसके अलावा 10 आरोपियों को सुबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।
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सीबीआई अदालत में मंगलवार को दोनों पक्ष ने अपनी अंतिम दलीलें पेश की थीं। इन सभी आरोपियों के खिलाफ सीबीआई ने 2013 में चार्जशीट फाइल की थी। अदालत की ओर से 7 मार्च 2014 को नवीन सहगल समेत 12 लोगों पर आरोप तय किए गए थे। हालांकि, इस मामले में 14 लोगों पर मामला दर्ज किया गया था, जिनमें से सौरभ कांत और राजपाल सरकारी गवाह बन गए थे।
दोषी करार होते ही बेहोश हो गया नवीन सहगल
सीबीआई जज के दोषी करार देते ही नवीन सहगल अदालत में बेहोश होकर गिर गया। इस दौरान उसके परिजन जोर-जोर से रोने लगे। यह देखकर मौके पर डॉक्टर को बुलाना पड़ा। हालांकि, कुछ देर बाद तबीयत सामान्य हो गई। दोषी करार देने के बाद दोनों दोषियों को जेल भेज दिया गया।
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ये लोग हुए बरी
उम्मीदवार दुष्यंत कुमार, प्रीतम सिंह, दीपक दहिया, राकेश शर्मा, दिनेश कुमार, सुबोध गौड़, दीपक संधू, हरगोबिंद, चित्रा वसु और संदीप को अदालत ने बरी कर दिया। इन लोगों पर सीबीआई कोई भी आरोप साबित नहीं कर पाई। इन सभी पर लिखित परीक्षा में जालसाजी, धोखाधड़ी व अनियमितता बरतने का आरोप था। इन उम्मीदवारों में से एक दुष्यंत कुमार के वकील तरमिंदर सिंह ने कहा कि दुष्यंत को मामले में झूठा फंसाया गया था, जबकि उसके खिलाफ कोई सबूत भी नहीं थे। परीक्षा में गड़बड़ी के बारे में उसकी किसी आरोपी से कोई बातचीत भी नहीं हुई थी।
यह है मामला
सीबीआई को 2011 में शिकायत मिली थी कि अर्द्धसैनिक बल में एएसआई पद के लिए हुई लिखित परीक्षा में गड़बड़ियां हुई हैं। जांच में पता चला था कि अंबाला स्थित केंद्र के एक ही कमरे में बैठे 9 आवेदक परीक्षा में अव्वल आए थे। छापेमारी में सीबीआई को अव्वल आने वाले उम्मीदवारों के भिवानी स्थित घर से संदिग्ध कागजात मिले थे। इस दौरान सीबीआई को पता चला था कि इस गड़बड़ी में एसएससी के कई कर्मचारी शामिल थे। वहीं, परीक्षा में उत्तीर्ण न होने वाले दो उम्मीदवारों ने भी सीबीआई में शिकायत की थी, जिसके बाद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
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