शिक्षा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. विनोद कुमार की संदिग्ध हालात में मौत के बाद किताब घोटाले का जिन्न एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। मार्च-13 के अंत में कुछ स्कूलों में लाइब्रेरी की किताबों में अश्लील सामग्री की शिकायत आई। जिसकी जांच डीजीएसई केएस पन्नू को सौंपी गई।
जांच आगे बढ़ी तो सामने आया कि किताबों की खरीद में घपला हुआ था। सरदूलगढ़ की कंपनी ने डीपीआई का नॉमिनेशन लेटर दिखाकर किताबें सप्लाई करने के लिए प्राइमरी से तीन हजार और अपर प्राइमरी स्कूलों से दस हजार रुपये ले लिए।
किताबें ज्यादा रेट पर सप्लाई की गईं। किताबों में अश्लील सामग्री की शिकायत पर डीजीएसई केएस पन्नू ने पर्चेज और कंटेंट कमेटी को दोषी करार दिया।
मलूका को दी गई थी क्लीन चिट
दिलचस्प बात यह थी कि कंटेंट कमेटी के सभी सदस्य मलूका के गृह जनपद के और दो टीचर तो उनके गांव के स्कूल के ही थे। मामला सुर्खियां बना तो कांग्रेस ने धावा बोल दिया और शिक्षामंत्री से इस्तीफे की मांग करने लगी। 27 मई को मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने रिटायर्ड जस्टिस एएन जिंदल की अगुवाई में जांच आयोग गठित कर दिया।
इसी दिन कमेटी के तीनों सदस्यों को सस्पेंड कर दिया गया। गुरतेज सिंह अगस्त-13 में बहाल हो गए, प्रितपाल कौर व डॉ. विनोद कुमार को जनवरी-14 में बहाल किया गया। कुछ महीने पहले जिंदल कमीशन ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी।
जिसमें मलूका को क्लीन चिट देते हुए कहा है कि उन्होंने सिर्फ किताबों की खरीद के लिए सुझाव देने के लिए कमेटी गठित की थी। कमेटी ने अधिकार क्षेत्र से आगे जाकर काम किया है। हालांकि सरकार ने अब तक कमीशन की रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं की है।
पाइप कंपनी को किताब का टेंडर
सर्व शिक्षा अभियान के तहत लाइब्रेरी किताबों की खरीद स्कूल मैनेजमेंट कमेटियां करती हैं, लेकिन खुलासा हुआ कि शिक्षामंत्री सिकंदर सिंह मलूका ने 28 फरवरी को आदेश जारी कर किताबों की खरीद को कमेटी गठित की। जिसमें डीपीआई-एलिमेंट्री प्रितपाल कौर, डीईओ डॉ. विनोद कुमार और पीएसईबी के एफडीओ गुरतेज सिंह शामिल थे।
इस कमेटी ने सभी नियमों को दरकिनार कर किताबें सप्लाई करने के लिए सरदूलगढ़ की फ्रेंड्स एंटरप्राइजेज को चुना। जो पब्लिशर नहीं, बल्कि पाइप बनाने का काम करती थी।
केंद्रीय टीम ने भी की थी जांच
कांग्रेस की मांग पर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की उच्चस्तरीय टीम भी 14 जून-13 को मामले की जांच के लिए पहुंची थी। सभी ने टीम के सामने अपना पक्ष रखा था।
कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि एसएसए और रमसा के तहत खरीद में नियमों को तोड़ा गया। नियमों के खिलाफ खरीद पैनल बनाया गया और किताबों का स्तर भी ठीक नहीं था।