कोरोना संकट के बीच वर्ल्ड फूड सेफ्टी डे के मौके पर चंडीगढ़ के नाम एक बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। खाद्य सुरक्षा सूचकांक में लगातार दूसरे साल चंडीगढ़ देश के सभी केंद्रीय शासित राज्यों में पहले नंबर पर आया है। वहीं, दूसरे स्थान पर दिल्ली और तीसरे स्थान पर अंडमान रहा है।
खाद्य सुरक्षा सूचकांक एक तरह का मीटर है, जो बताता है कि शहर में खाद्य सुरक्षा (फूड सेफ्टी) के लिए सरकार या प्रशासन की ओर से उठाए जा रहे कदम कितने प्रभावी हैं। चंडीगढ़ ने इस क्षेत्र में काफी अच्छा कार्य किया है। सिटी ब्यूटीफुल में खाद्य सुरक्षा को लेकर इस वर्ष कई तरह के कदम उठाए गए, जिससे चंडीगढ़ पूरे देश के लिए एक मॉडल बना।
चंडीगढ़ फूड सेफ्टी विंग के डेजिग्नेटेड आफिसर सुखविंदर सिंह ने बताया कि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण की ओर से हर साल खाद्य सुरक्षा सूचकांक एक मैरिट तैयार की जाती है। इसके लिए एक नेशनल कमेटी गठित होती है, जो पांच पैरामीटर पर राज्यों व यूटी में फूड सेफ्टी में सुधार के लिए उठाए गए कदमों की समीक्षा होती है।
समीक्षा के आधार पर ही राज्यों को नंबर दिए जाते हैं और नंबर के हिसाब से ही राज्यों की मैरिट बनती है। इस बार राज्यों को तीन श्रेणी में बड़ा प्रदेश, छोटा प्रदेश और यूटी। बीते सालों में चंडीगढ़ में सेक्टर-11 पोस्ट ग्रेजुएट गर्ल्स कालेज को ईट राइट कैंपस घोषित किया गया। इसका थर्ड पार्टी ने ऑडिट किया। उसके बाद सेक्टर आठ की इनर मार्केट को क्लीन स्ट्रीट फूड हब घोषित किया।
समय-समय पर शहर के होटलों, रेस्टोरेंट और स्ट्रीट फूड की जांच कर रीयूज कुकिंग ऑयल को चेक किया गया। पूरे शहर में अवेयरनेस कैंप लगाकर मिलावटी फूड के बारे में लोगों को जागरूक किया। इसके साथ होटल, रेस्टोरेंट में काम करने वाले शेफ व कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी गई। मिलावटी केस आने पर आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है।