चंडीगढ़ में अचानक कोरोना के मामले बढ़ने से प्रशासनिक अधिकारी चिंतित हैं। बुधवार को ट्राइसिटी के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने पंजाब और हरियाणा के साथ मिलकर एक सामान्य रणनीति बनाने पर जोर दिया। उन्होंने स्वास्थ्य व गृह सचिव अरुण कुमार गुप्ता को यह जिम्मेदारी सौंपी है कि वह पड़ोसी राज्यों से बातचीत करें ताकि शहर में दाखिल होने वाले लोगों की जांच के लिए एक ठोस रणनीति बनाई जा सके।
बैठक में कई अन्य महत्वपूर्ण फैसले भी लिए गए। प्रशासक ने पीजीआई के डायरेक्टर की अध्यक्षता में जीएमसीएच-32 और जीएमएसएच-16 के प्रतिनिधियों को मिलाकर एक कमेटी का गठन किया, जो यह सुनिश्चित करेगी कि शहर के विभिन्न अस्पतालों में अनचाही भीड़ एकत्रित न हो। कमेटी को एक व्यवस्था तैयार करने के लिए कहा गया है, जिससे कि पीजीआई में सिर्फ गंभीर मामलों को ही भेजा जाए, क्योंकि पिछले दिनों में कई ऐसे मामले सामने आए थे, जिसमें कम गंभीर मरीजों को भी पीजीआई रेफर किया गया था। इसमें से कई के टेस्ट करने के बाद वह कोरोना पॉजिटिव भी पाए गए थे। इस पर चंडीगढ़ प्रशासन ने आपत्ति जताई थी।
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शहर मेडिकल हब के रूप में कैसे विकसित हो, यह भी बताएं: बदनौर
प्रशासक बदनौर की तरफ से बनाई गई कमेटी यह भी सिफारिश करेगी कि उत्तर क्षेत्र के लिए एक आदर्श मेडिकल हब के रूप में उभारने के लिए चंडीगढ़ को कैसे विकसित किया जा सकता है। बैठक में नगर निगम के कमिश्नर केके यादव ने बताया कि शहर के विभिन्न हिस्सों में सैनिटाइजेशन का काम किया जा रहा है। डीसी मनदीप सिंह बराड़ ने बताया कि शहर में अब तक 3,46,586 लोगों ने आरोग्य सेतु एप को डाउनलोड किया है। वित्त सचिव अरुण कुमार गुप्ता ने कहा कि शहर में फंसे लोगों व प्रवासी मजदूरों को घर तक पहुंचाने के लिए विभिन्न तरह के कदम उठाए जा रहे हैं।