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चंडीगढ़ में अपनी विवादित संपत्ति के मामलों को जल्दी निपटाएगा प्रशासन, फैसला आते ही लिए जाएंगे कब्जे

Fri, 04 Dec 2020 10:40 AM IST
निवेदिता वर्मा नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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चंडीगढ़ - फोटो : फाइल फोटो
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चंडीगढ़ में अब विवादित सरकारी संपत्ति के मामलों का जल्द से जल्द निस्तारण कर कब्जा लिया जाएगा। प्रशासक के सलाहकार मनोज परिदा ने कहा है कि मुख्य प्रशासक की अदालत में जो मामले लंबित हैं, उन्हें जल्द तारीख देकर सुनवाई की जाए। जैसे ही मामले में फैसला सुनाया जाए, अधिकारी तत्काल उक्त जमीन पर कब्जा लें ताकि कोई व्यक्ति सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग न कर सके।

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प्रशासक के सलाहकार ने 26 नवंबर को एस्टेट विभाग के मुख्य सचिव अरुण गुप्ता, नगर निगम आयुक्त केके यादव, डीसी मनदीप सिंह बराड़, चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के सीईओ यशपाल गर्ग, सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल पंकज जैन और अपने कानूनी सलाहकारों के साथ एक बैठक की थी। 


बैठक में सलाहकार ने कहा था कि कई मामले ऐसे हैं, जहां अधिकारियों की तरफ से संपत्तियों को रिज्यूम कर दिया गया है। उसके बाद कब्जा करने वाला व्यक्ति अदालत में चला जाता है। जहां से मामले में तारीख बढ़ती जाती है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति से किराया भी नहीं आता है और दूसरी ओर वह सरकारी संपत्ति का उपयोग करता रहता है। 
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सरकार की संपत्ति होने के बावजूद वहां अधिकारियों की शक्तियां समाप्त हो जाती हैं इसलिए ऐसे मामलों का सर्वे कराया गया है। नगर निगम, हाउसिंग बोर्ड और डीसी ऑफिस के अंतर्गत आने वाली ऐसी विवादित संपत्तियों के ज्यादातर मामले मुख्य प्रशासक की अदालत में लंबित हैं। वित्त सचिव को ही मुख्य प्रशासक के रूप में मामलों का निस्तारण करना होता है इसलिए प्रशासक ने वित्त सचिव का कार्यभार संभाल रहे अरुण गुप्ता से मामला जल्द से जल्द सुनवाई कर निस्तारण करने को कहा गया है। 

छह व्यावसायिक संपत्तियों पर कोई विवाद नहीं, फिर भी कब्जा नहीं ले पाए
सर्वे के अनुसार, नगर निगम की 25 व्यावसायिक संपत्तियां ऐसी हैं, जिन पर विवाद चल रहा था। इनमें से 6 संपत्तियों पर अब कोई विवाद नहीं हैं और न किसी अदालत ने रोक लगाई है। बावजूद इसके निगम इन संपत्तियों पर अपना कब्जा नहीं ले सका है। इसके अलावा 19 संपत्तियों पर सुनवाई मुख्य प्रशासक की अदालत में चल रही है। कुछ केस ऐसे भी हैं, जिनमें सालों से कोई तारीख नहीं लगी है। यही हालत डीसी ऑफिस व हाउसिंग बोर्ड के अंतर्गत आने वाली संपत्तियों की है। 

अधिकारियों में तालमेल की कमी, पसंद से करते हैं कार्रवाई  
बैठक में मनोज परिदा ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि हमारे अधिकारियों में तालमेल की कमी है। किसी भी आदेश के बाद तत्काल कार्रवाई नहीं होती। इससे सामने वाले पक्ष को सरकारी संपत्ति पर कब्जा करने का पूरा मौका मिलता है और वह सरकारी संपत्ति पर आराम से मजे लेता रहता है। सलाहकार ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकारी तय करते हैं आसानी से कौन सी संपत्ति खाली हो जाएगी और उस पर कार्रवाई कर लेते हैं। चुनकर कार्रवाई करने की प्रक्रिया के कारण ही ऐसी स्थिति पैदा होती है। कई संपत्तियों पर कोई केस न होने के बावजूद उस पर कब्जा ही नहीं लिया जा रहा है।

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