यूके स्ट्रेन के मामले सामने आने के बाद एहतियात बरतने को लेकर गंभीर होने की जरूरत है। प्रो. जगतराम का कहना है कि मास्क पहनना और सुरक्षित शारीरिक दूरी के नियम का पालन करना बेहद जरूरी हो गया है। भीड़भाड़ वाली जगह व गैरजरूरी यात्राओं से जितना हो सके, बचें। साथ ही जल्द से जल्द टीकाकरण करवाएं, क्योंकि टीका इस संक्रमण की गंभीरता को काफी हद तक कम करने में मददगार है।
इलाज के तरीके में नहीं होगा बदलाव
यूके स्ट्रेन वाले मरीजों का इलाज भी मूल वायरस से संक्रमित मरीजों की तरह ही किया जाएगा। प्रो. जगतराम का कहना है कि दोनों ही स्थिति में इलाज की तकनीक एक की रहेगी। इसमें परिवर्तन संबंधी कोई भी निर्णय सरकार के स्तर पर लिया जाएगा लेकिन अभी ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं हुआ है।
प्रो. जगतराम ने बताया कि खुद को जिंदा रखने के लिए किसी भी जीव के जीन में जो परिवर्तन होता है, उसे म्यूटेशन कहते हैं। इसकी मदद से वायरस एक समय में दो बार खुद को म्यूटेट कर लेता है। साधारण भाषा में कहें तो वायरस जिंदा रहने के लिए बाहरी आक्रमण को झेल पाए, इसके लिए वह खुद को बदल लेता है। जब ये क्षमता दोगुनी हो जाती है तो उसे डबल म्यूटेशन कहते हैं। इसके बल पर जीव दोबारा खुद को बदल लेता है। यही कारण है यह वायरस इस बार तेजी से फैल रहा है।