डीसी ऑफिस में रोजाना करीब एक हजार लोग विभिन्न कामों के लिए स्टांप पेपर लेने आते हैं। कभी-कभी तो यह संख्या और अधिक हो जाती है। यहां पर हर रोज 10 से 12 हजार रुपए तक के स्टांप पेपर इस्तेमाल किए जाते हैं।
इन कामों में प्रयोग होता है स्टांप
ज्यादातर रेंट एग्रीमेंट से लेकर एफिडेविट तक में स्टांप का आता है। इसके साथ ही लाइसेंस बनवाने, प्रापर्टी सेल-परचेज, सेल डीड, मोर्टगेज, मैरिज रजिस्ट्रेशन, पेइंग गेस्ट रजिस्ट्रेशन में भी स्टांप पेपर का इस्तेमाल होता है।
अभी दोनों मोड में चलेगी प्रक्रिया
शुरुआती दौर में ई-रजिस्ट्रेशन फीस सिस्टम के तहत ई-रजिस्ट्रेशन या डाक्यूमेंट रजिस्ट्रेशन के दौरान अन्य किसी भी तरह की फीस रजिस्टरी इत्यादि के दौरान लगती है तो फीस जमा कराने की व्यवस्था ऑनलाइन तो उपलब्ध रहेगी ही।
वहीं ऑथराइज्ड कलेक्शन सेंटरों पर भी इसे ऑफलाइन जमा कराया जा सकता है। कुछ समय बाद दोनों पेमेंट की सुविधा वाइज आकलन किया जाएगा। इसके बाद अगर जरूरी हुआ तो वर्तमान पेमेंट प्रक्रिया को बंद करने पर निर्णय लिया जा सकता है।
ऑनलाइन स्टांप पेपर के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर लॉगइन करना होगा, जहां स्टांप पेपर खरीदने वालों को अपनी पूरी जानकारी जैसे नाम, पता, मोबाइल नंबर, ई-मेल आईडी, आधार नंबर आदि पोर्टल में रजिस्टर करना होगा। यह जानकारी भी देनी होगी कि कितने रुपये का स्टांप पेपर चाहिए।
सॉफ्टवेयर में रजिस्टर्ड ई मेल आईडी पर सरकार की नोडल एजेंसी स्टांप पेपर का लिंक भेजेगी, जिस पर पहले ही स्टांप नंबर होगा। आपको केवल घर बैठे उसका ऑनलाइन प्रिंट निकलवाना होगा। इस पूरी प्रक्रिया में अधिकतम पांच मिनट का ही समय लगेगा।
रजिस्ट्री के दौरान दो तरह की फीस जमा करनी होती है। स्टांप ड्यूटी पहले ही ऑनलाइन जमा हो रही थी। अब रजिस्ट्रेशन फीस जमा करने की व्यवस्था ऑनलाइन कर दी गई है। -अरुण कुमार गुप्ता, प्रिंसिपल होम सेक्रेटरी यूटी प्रशासन
ई-रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू होने से शहर के लोगों को लाइन में लगने से जहां निजात मिलेगी, वहीं लोग घर बैठे कुछ मिनटों में ही आवेदन कर सकेंगे।
-आईएएस जितेंदर यादव, प्रभारी डीसी चंडीगढ़