गर्भवती महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों को सस्ते रेट पर पौष्टिक आहार उपलब्ध करवाने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन एक योजना पर काम कर रहा है। इसमें आंगनबाड़ी और अन्नपूर्णा योजना के तहत मुहैया कराए जा रहे भोजन में दूध, पनीर, फल और सोयाबीन जैसे न्यूट्रीशन दिए जा सकते हैं। अभी अन्नपूर्णा योजना के तहत दस रुपये में पांच रोटी और सब्जी दी जा रही है, जबकि आंगनबाड़ी में दलिया व दाल के साथ वीकली आहार दिया जा रहा है।
इसके लिए सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट की ओर से गरीब तबके को जागरूक करने के लिए एक अभियान चलाया जा रहा है। जिससे कम पैसे खर्च कर उन्हें अधिक न्यूट्रीशन वैल्यू मिल सके। पौष्टिक भोजन से जहां गरीबों का पेट भरेगा, वहीं इससे बच्चे और गर्भवती महिलाएं शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होंगे। लो कॉस्ट रेसिपी को लेकर जल्द ही प्रशासन अपने एक्सपर्ट की राय लेकर केंद्र सरकार को पूरा खाका भेजेगी।
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्कीम के तहत 90 प्रतिशत राशि सेंटल से मिलेगी, जबकि 10 प्रतिशत राशि स्टेट को स्वयं जुटानी होगी। खासतौर से गरीब तबके के छोटे बच्चे, गर्भवती व छोटे बच्चों को दूध पिलाती महिलाओं के साथ गरीब तबके के लोग इस स्कीम के दायरे में हैं। हालांकि, प्रशासन की योजना के तहत रेडक्रास सोसायटी के द्वारा पीजीआई सहित शहर के करीब एक दर्जन जगहों पर 10 रुपये में गरीबों को खाना दिया जा रहा है।
इस खाने से पेट तो भर जाता है, लेकिन शारीरिक और मानसिक रूप से लोगों की क्षमता का विकास कम ही होता है। ऐसे में प्रशासन गरीब तबके के लोगों का पेट भरने के साथ ही उन्हें शारीरिक एवं मानसिक रूप से मजबूत बनाने के लिए पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने जा रहा है।
बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर रहेगा फोकस
शहर के विभिन्न आंगनबाड़ी सेंटरों को चुस्त दुरुस्त किया जा रहा है। स्कीम सही से लागू हो इसके लिए सोशल वेलफेयर विभाग में अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती भी की जा रही है। इस वक्त शहर में 420 आंगनबाड़ी सेंटर हैं। यहां कर्मचारियों की टीम बनाई गई है। अभी कुछ कर्मचारियों की भर्ती की गई है, लेकिन ज्यादातर स्टाफ का रेशनलाइजेशन किया गया है ताकि सब सेंटरों पर बेहतर काम हो सके।
सोशल वेलफेयर विभाग उन स्थानों पर टारगेट कर रहा है, जहां ऐसे लोगों की तादाद ज्यादा हो सकती है। इसमें शहर की कालोनियां, लो इनकम से जुड़े लोगों के इलाके शामिल हैं। सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों और सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने पहुंची महिलाओं की सेहत पर विशेष जोर दिया जाएगा।
मेरा काम लोगों में जागरूकता फैलाना है ताकि गरीब तबके के लोगों को पेट भरने के साथ ही उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाया जा सके। इसके लिए भोजन के रूप में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को पौष्टिक भोजन देने की योजना बना रहे हैं।
- बीएल शर्मा, सेक्रेटरी सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट यूटी प्रशासन