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चंडीगढ़ प्रशासन के हाल: 15 दिन पहले परवरिश योजना को किया अधिसूचित, फंड को अब तक नहीं मिली मंजूरी

Wed, 28 Jul 2021 12:21 PM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

जिन बच्चों ने कोरोना के चलते अपने माता-पिता में से एक या दोनों को खो दिया है, उन्हें इस योजना में शामिल किया गया है। इसके अलावा बाल देखभाल संस्थानों में रह रहे बच्चों को भी इस योजना में शामिल किया गया है और उनकी शिक्षा-चिकित्सा और पोषण संबंधी खर्च प्रशासन के समाज कल्याण विभाग की तरफ से उठाया जाएगा।  
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परवरिश योजना। - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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चंडीगढ़ प्रशासन ने 12 जुलाई को परवरिश योजना की अधिसूचना जारी कर दी थी, लेकिन 15 दिन बीत जाने के बाद भी इस योजना के लिए फंड की मंजूरी नहीं मिली है। कोरोना से प्रभावित बच्चे जो राहत की उम्मीद में बैठे हुए हैं, प्रशासन की अनदेखी की वजह से उनका इंतजार बढ़ता जा रहा है। प्रशासन के अनुसार ऐसे कई बच्चे हैं, जिन्होंने कोरोना के चलते अपने माता-पिता को खोया है। इसमें कई परिवार ऐसे भी हैं, जिसमें एक ही कमाने वाला था, लेकिन कोरोना के चलते उसकी मृत्यु हो गई, इसलिए ही यह योजना लागू की गई है, लेकिन अब लगभग कोरोना की दूसरी लहर भी बीत चुकी है, लेकिन ये बच्चे राहत का इंतजार ही कर रहे हैं। 

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प्रशासन के विभागों की लेट-लतीफी की वजह से अभी उन बच्चों तक भी राहत नहीं पहुंची है, जिनकी विभाग ने खुद पहचान की है। प्रशासक वीपी सिंह बदनौर की मंजूरी के बाद 12 जुलाई को इस योजना की अधिसूचना जारी की गई, लेकिन योजना को फंड ही नहीं मिला है तो वह बच्चों तक कैसे पहुंचेगा। 


विभाग ने 112 बच्चों के लिए करीब डेढ़ करोड़ रुपये की वित्त विभाग से मांग की है। फंड की मंजूरी की फाइल अभी तक वित्त विभाग के पास ही लंबित पड़ी है। वित्त सचिव विजय नामदेव राव जड़े का कहना है कि फाइल विभाग के पास आई है और देखा जा रहा है कि किस हेड से इस योजना के लिए फंड जारी किया जाए।

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इन बच्चों को मिलना है योजना का लाभ

योजना के तहत जिन बच्चों ने कोरोना के चलते अपने माता-पिता में से एक या दोनों को खो दिया है, उन्हें इस योजना में शामिल किया गया है। इसके अलावा बाल देखभाल संस्थानों में रह रहे बच्चों को भी इस योजना में शामिल किया गया है और उनकी शिक्षा-चिकित्सा और पोषण संबंधी खर्च प्रशासन के समाज कल्याण विभाग की तरफ से उठाया जाएगा। 

बच्चे के नाम पर तीन लाख रुपये की फिक्स डिपॉजिट (एफडी) भी करवाई जाएगी, जो 21 वर्ष की आयु के बाद मिलेगी। सरकारी स्कूल में ऐसे बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान की जाएगी, जबकि निजी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को भी वार्षिक वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अलावा अगर वह 18 वर्ष के बाद डिप्लोमा कोर्स, ग्रेजुएशन या फिर तीन साल का डिग्री कोर्स और प्रोफेशनल डिग्री करते हैं तो भी उन्हें वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। योजना के अनुसार कोरोना पॉजिटिव होने वाले बच्चों को पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरी करने के लिए तीन माह तक 2500 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।

अगर आपके पास है ऐसे किसी बच्चे की जानकारी तो इस नंबर पर करें संपर्क
समाज कल्याण विभाग की विशेष सचिव नितिका पवार का कहना है कि इस योजना के तहत अभी 112 बच्चों की पहचान की गई है। आने वाले दिनों में अगर अन्य बच्चे की भी पहचान होती है तो उन्हें भी योजना के तहत राहत प्रदान की जाएगी। अगर किसी भी व्यक्ति के पास ऐसे किसी बच्चे की जानकारी है तो वह जिला बाल संरक्षण इकाई के हेल्पलाइन नंबर 0172-2643654 पर संपर्क कर सकता है।
परवरिश योजना के तहत फंड जारी करने के लिए समाज कल्याण विभाग की तरफ से फाइल वित्त विभाग के पास आई है। देखा जा रहा है कि किस हेड से इस योजना के लिए फंड जारी किया जाए।  - विजय नामदेव राव जड़े, वित्त सचिव
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