जेल के अंदर कैदियों की विभिन्न कारणों की वजह से होने वाली मृत्यु पर मुआवजे की नीति बनाई गई है। यूटी प्रशासन की तरफ से नीति की अधिसूचना जारी कर दी गई। इसके अनुसार अगर अगर किसी कैदी की मौत जेल स्टाफ के पीटने से होती है तो कैदी के परिवार को साढ़े सात लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।
नीति के अनुसार अगर कैदियों की आपसी मारपीट में किसी की जान जाती है तो उसमें भी कैदी के परिवार को साढ़े सात लाख का मुआवजा जेल प्रशासन की तरफ से दिया जाएगा। इसके अलावा अगर ड्यूटी के दौरान किसी जेल कर्मचारी, मेडिकल कर्मचारी या जेल के डॉक्टर की लापरवाही की वजह से किसी कैदी की जान जाती है तो इस केस में कैदी के परिवार को पांच लाख रुपये दिए जाएंगे।
अगर कोई कैदी जेल के अंदर आत्महत्या करता है तो इस मामले में भी पांच लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। प्रशासन ने मुआवजा जारी करने के लिए प्रक्रिया भी तय कर दी है। इसके अनुसार जेल अधीक्षक की तरफ से न्यायिक जांच रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मौत के कारण, मेडिकल हिस्ट्री आदि की रिपोर्ट बनाकर चंडीगढ़ के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ प्रिजन को भेजा जाएगा। सभी तरह की जांच के बाद प्रशासन के गृह सचिव की तरफ से मुआवजा राशि को जारी करने का आदेश जारी किया जाएगा।
बीमारी की वजह से हुई मृत्यु पर नहीं मिलेगा मुआवजा
प्रशासन की तरफ से नीति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अगर सामान्य कारणों में या बीमारी की वजह से किसी कैदी की मृत्यु होती है तो उसके परिवार को मुआवजा नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा अगर किसी कैदी ने भागने की कोशिश की और उस दौरान उसकी मृत्यु हो जाए तो भी मुआवजा नहीं दिया जाएगा। अगर किसी कैदी की मृत्यु प्राकृतिक आपदा की वजह से होती है तो भी मुआवजा नहीं मिलेगा।