31 अगस्त से पहले प्रशासन 120 कर्मचारियों के इंटर डिपार्टमेंटल ट्रांसफर पॉलिसी के तहत ट्रांसफर करेगा। ट्रांसफर के लिए पर्सोनल विभाग ने सभी विभागों से उनके कर्मचारियों का ब्योरा मांगा है। इसमें पूछा गया है कि विभाग में कौन सा कर्मचारी कितने वर्षों से काम कर रहा है। लंबे समय से एक ही जगह जमे कर्मियों को बदला जाएगा। जिन कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति और पनोन्नति को एक साल हैं, उन्हें नहीं बदला जाएगा।
प्रशासन के इस फैसले की सुगबुगाहट ने एक बार फिर हलचल पैदा कर दी है। हर कोई अपनी कुर्सी के लिए चिंतित है। इससे पहले भी प्रशासन ने इस पॉलिसी के तहत 348 कर्मचारियों के ट्रांसफर किए थे। लेकिन बाद में एचओडी की सिफारिश और अन्य कारणों से करीब 100 कर्मचारियों के ट्रांसफर ऑर्डर वापस ले लिए थे। कुछ दिन कर्मचारियों ने नए विभागों में जाकर काम अलग होने पर शोर भी मचाया। लेकिन प्रशासन फैसले पर अडिग रहा।
यूटी के इतिहास में पहली बार इस पॉलिसी के तहत ट्रांसफर हुए थे। इससे पहले जो कर्मचारी जिस विभाग में ज्वाइन करता था, वहीं से सेवानिवृत्त हो रहा था। अधिकारी आते-जाते रहते थे बाबू फाइलों पर जमे बैठे रहते थे। काम की गति को बढ़ाने और सिस्टम को पारदर्शी बनाने के लिए ही इंटर डिपार्टमेंटल ट्रांसफर शुरू हुए हैं।