फीस को लेकर अभिभावकों ने किया था प्रदर्शन।
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बढ़ी हुई फीस जमा करने का दबाव झेल रहे लाखों अभिभावकों को यूटी प्रशासन ने बड़ी राहत दी है। शहर के निजी स्कूल इस सत्र में अपनी फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने इस पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। साथ ही कहा है कि अभिभावक पहले ही कोरोना संकट से जूझ रहे हैं, ऐसे में फीस बढ़ाकर और बोझ नहीं डाला जा सकता।
बुधवार शाम हुई बैठक के बाद प्रशासक वीपी सिंह बदनौर की ओर से एडवाइजर मनोज परिदा ने इस संबंधी आदेश जारी किए। बता दें प्राइवेट स्कूल हर साल फीस में आठ से दस प्रतिशत का इजाफा कर देते हैं। इस बार भी ऐसा ही हुआ। इसे लेकर अभिभावक लगातार स्कूलों के सामने प्रदर्शन से लेकर अफसरों तक से गुहार लगा रहे थे। इस फैसले से उन्हें राहत मिली है।
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प्रशासन ने साफ कर दिया है कि स्कूल ट्यूशन फीस सत्र 2019-20 के अनुसार ही लेंगे। इसमें भी अभिभावकों से ट्यूशन फीस के अलावा कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं वसूला जाएगा। इसके साथ ही सभी निजी स्कूलों को फीस स्ट्रक्चर, खासतौर से ट्यूशन फीस को फीस रेगुलेशन एक्ट 2016 के सेक्शन- 5सी के प्रोविजन के तहत वेबसाइट पर अपलोड करना होगा ताकि पारदर्शिता बनी रहे। स्कूलों को इसके लिए 15 जून तक का समय दिया है।
यह लिखा आदेश में..
आदेश में लिखा गया है कि गवर्नर ऑफ पंजाब और यूटी के प्रशासक जो स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के चेयरपर्सन भी हैं, वह डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट, 2005, सेक्शन 39 (आई) के तहत यह स्कूलों को यह आदेश जारी कर रहे हैं।
पैरेंट्स एसोसिएशन ने किया प्रशासन का धन्यवाद
चंडीगढ़ पैरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नितिन गोयल ने परिजनों को राहत देने के लिए प्रशासन का धन्यवाद किया है। इसके साथ ही उन्होंने बताया प्राइवेट स्कूल अपने अन्य खर्चों को पिछले कई सालों से ट्यूशन फीस में मिलाकर ही वसूल रहे हैं। प्रशासन स्कूलों को फीस का ब्रेकअप दिखाने के निर्देश भी जारी करे।
क्या कहते हैं अभिभावक
प्रशासन ने फैसला देरी से लिया है। हालांकि इस फैसले से परिजनों को थोड़ी राहत मिलेगी। लेकिन यह तभी हो पाएगा जब प्राइवेट स्कूल प्रशासन के आदेशों का पालन करें। पहले भी प्रशासन की तरफ से फीस को लेकर दिए गए किसी भी आदेश को प्राइवेट स्कूलों ने नहीं माना। हालांकि प्रशासन के आदेशों के बावजूद स्कूलों ने ट्यूशन फीस के अलावा अन्य फीस भी परिजनों से ले ली।
- कौशल
फीस में छूट की मांग कर रहे थे अभिभावक
प्रशासन का यह फैसला परिजनों के हित में नहीं है। लॉकडाउन के कारण ज्यादातर परिजनों की आय बिलकुल बंद थी। हम फीस में 30 या 50 प्रतिशत की छूट मांग रहे थे। प्राइवेट स्कूल पिछले कई सालों से ट्यूशन फीस के साथ मिलाकर बिल्डिंग फीस, कंप्यूटर फीस और कल्चरल फीस ले रहे हैं। काम बंद होने के कारण हम अभी तक बच्चों की फीस जमा नहीं करवा पाए हैं। - अजय
प्रशासन ने खुद ही पहले 31 मई तक फीस जमा करने का फरमान सुनाया था
प्रशासन अपने ही आदेशों की बिना जांच किए फैसले दे रहा है। प्रशासन ने खुद पिछले आदेश में परिजनों को 31 मई से पहले फीस जमा करवाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद स्कूल से बच्चे का नाम कट जाने के डर से ज्यादातर परिजनों ने जैसे तैसे इंतजाम कर फीस जमा कर दी। परिजनों को तभी इस आदेश का फायदा होगा, जब बढ़ाई हुई फीस और ट्यूशन फीस के अलावा लिए गए अन्य चार्ज को स्कूल अगले महीने की फीस में एडजस्ट करें या परिजनों को लौटाएं। -इमाम जफ्फर
हाईकोर्ट तक पहुंच गए थे निजी स्कूल
लॉकडाउन के दौरान प्रशासन ने पहले निर्देश जारी किया था कि स्कूल खुलने के एक महीने बाद प्राइवेट स्कूल परिजनों से फीस जमा कराएंगे। प्रशासन के इस फैसले के खिलाफ इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर फीस लेने की अनुमति मांगी। इस पर हाईकोर्ट ने प्रशासन को एक हफ्ते का समय देते हुए स्कूलों की बात सुनने के लिए कहा।
प्रशासन के शिक्षा विभाग ने इस पर प्रतिक्रिया स्वरूप 18 मई को परिजनों को आदेश दिए कि वे सिर्फ ट्यूशन फीस जमा करा दें। लेकिन प्राइवेट स्कूलों ने अपनी मनमानी करते हुए सभी तरह की फीस को ट्यूशन फीस में मिलाकर परिजनों को नोटिस भेजने शुरू कर दिए। अभिभावक इसके विरोध में सड़कों पर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
शिक्षा सचिव ने नहीं दिया रिस्पांस
शिक्षा सचिव अरुण गुप्ता के मोबाइल पर उनकी प्रतिक्रिया लेने के लिए मैसेज भेजा गया लेकिन उनकी तरफ से कोई रिस्पांस नहीं मिला। अरुण गुप्ता ने ही 31 मई से पहले अभिभावकों को फीस जमा करने का फरमान सुनाया था।