केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश को मानना यूटी प्रशासन के लिए मजबूरी बन गया है। यही वजह है कि प्रशासन ने जुलाई 2018 में जारी अपने फैसले को पलट दिया। और सिख महिलाओं के हेलमेट पहनने की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है। बीते 11 अक्तूबर को मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स (एमएचए) ने प्रशासन के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें शहर के सभी महिला एवं पुरुषों को हेलमेट पहनना अनिवार्य कर दिया गया था। इस मामले में प्रशासन ने फजीहत से बचने के लिए जनमत का सहारा लिया। अब जनमत आने के बाद सिख महिलाओं के हेमलेट पहनने की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया है। इसके लिए बाकायदा प्रशासक वीपी सिंह बदनौर के निर्देश पर यूटी प्रशासन ने सोमवार को दोबारा नोटिफिकेशन जारी किया है।
बादल के अनुरोध पर लिया गया निर्णय
सिख महिलाओं के हेलमेट पहनने के मुद्दे को लेकर पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने अक्तूबर महीने में नई दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की थी। इसके बाद गृह मंत्रालय ने यह निर्देश जारी किया है। इस मसले पर शिअद की ओर से बताया गया था कि बादल को गृहमंत्री ने भरोसा दिया है कि जुलाई 2018 में चंडीगढ़ में जारी सिख महिलाओं के लिए हेलमेट को आवश्यक बनाने वाले नोटिफिकेशन को वापस लिया जाएगा। उन्हें पहले की तरह दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनने से छूट दी जाएगी।
ऐेसे मिली है सिख महिलाओं को छूट
दिल्ली परिवहन विभाग ने चार जून 1999 को जारी अधिसूचना के जरिये दिल्ली मोटर वाहन अधिनियम 1993 के नियम 115 में संशोधन करते हुए महिलाओं के लिए दोपहिया वाहन चलाते या सवारी करते हुए सुरक्षात्मक हेडगियर (सिर को सुरक्षित रखने वाला उपकरण) पहनने को वैकल्पिक बना दिया था। 28 अगस्त, 2014 में जारी अधिसूचना के जरिये नियम में और संशोधन किया गया ताकि दिल्ली मोटर वाहन नियम 1993 के उप नियम 115 में महिला शब्द की जगह सिख महिला शब्द डाला जाए, जिसके चलते सिख महिलाओं को हेलमेट पहनने से छूट मिल गई थी।
यह था मामला
जुलाई 2018 में प्रशासन ने नोटिफिकेशन जारी कर सभी महिलाओं के लिए टू व्हीलर ड्राइव करते समय हेलमेट पहनना अनिवार्य किया था। यह फैसला पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देश के बाद लिया गया था। अभी तक सैकड़ों महिलाओं के चालान भी किए जा चुके हैं, लेकिन चंडीगढ़ के इस फैसले का शिरोमणि अकाली दल पहले दिन से ही विरोध करता रहा है। इसे लेकर पंजाब के राज्यपाल एवं यूटी प्रशासक वीपी सिंह बदनौर से शिअद प्रतिनिधियों ने मिलकर विरोध जताया था। बावजूद इसके सिख महिलाओं को छूट नहीं दी गई थी। यूटी प्रशासन की ओर से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों के बाद नोटिफिकेशन जारी की गई थी।