यूटी प्रशासन ने मेयर चुनाव की तिथि तय कर दी है। 10 जनवरी 2020 को चंडीगढ़ के 26वें मेयर का चुनाव किया जाएगा। खास बात यह है कि इस बार मेयर पद के लिए महिला सीट आरक्षित है। चुनाव की तिथि घोषित होने के साथ ही भाजपा में लॉबिंग तेज हो गई है।
अभी तक भाजपा पार्षद सुनीता धवन और हीरा नेगी के नाम ही दावेदारों की लिस्ट में थे लेकिन पार्षद राजबाला ने आकर दावेदारी को त्रिकोणीय बना दिया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन गुट और सांसद किरण खेर गुट के पार्षद भी राजबाला मलिक के नाम को लेकर सहमति जता रहे हैं।
वहीं हाल ही में भाजपा की हुई बैठकों ने इन अटकलों ने भी जोर पकड़ लिया है कि हीरा नेगी के पक्ष में न प्रदेश अध्यक्ष का गुट है और न ही सांसद का। महिला सीट रिजर्व होने के कारण भाजपा में अन्य दावेदार भी सामने आ गए हैं। एक ओर चंद्रवती शुक्ला ने अपना दावा ठोक दिया है तो वहीं फर्मिला ने भी अपने को मेयर पद की दौड़ में बताया है।
इस दावेदारी से भी अब पार्षदों की धड़कनें बढ़ गईं हैं, क्योंकि कई बार मेयर पद में एक और दो वोट से जीत व हार मिली है इसलिए गुटबाजी ने सभी को असमंजस में डाला हुआ है।
आशा जसवाल भी हो सकती हैं दावेदार
फिर से मेयर बनने की दावेदारी पार्षद आशा जसवाल भी पेश कर सकतीं हैं, लेकिन दो साल पहले ही वह मेयर रह चुकीं हैं। इसके अलावा वर्तमान में उन्हें पार्टी की ओर से भाजपा महिला मोर्चा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी बनाया गया है। पार्टी हाईकमान यह सोच सकती है। वहीं हीरा नेगी को पार्टी 2015 में एक मौका दे चुकी है। अब सुनीता धवन की दावेदारी ही शेष बचती है। इसमें अनुभवी होने के कारण राजबाला मलिक को प्राथमिकता दी जा सकती है।
कमला शर्मा थीं पहली मेयर
नगर निगम की पहली मेयर कमला शर्मा रही हैं। सबसे अधिक कार्यकाल वाले मेयर देवेश मोदगिल हैं। इनका कार्यर्काल 9 जनवरी 2018 को शुरू हु़आ, लेकिन कार्यकाल की समाप्ति 18 जनवरी 2019 को हुई। सबसे कम कार्यकाल वाले मेयर गुरचरण दास काला रहे। गुरचरण दास काला एक्टिंग मेयर बनाए गए थे। उनका कार्यकाल मात्र 27 दिनों का रहा था।
यह है नगर निगम में दलीय स्थिति
इस बार नगर निगम में 26 पार्षद हैं। पांच कांग्रेस, एक अकाली और भाजपा के 20 पार्षद हैं। मनोनीत पार्षदों की संख्या नौ है, लेकिन मनोनीत पार्षद मताधिकार में शामिल नहीं हो सकते हैं। सांसद का भी एक वोट नगर निगम मेयर चुनाव के लिए पड़ता है।