चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम के इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी पिछले कई सालों से टेंडर के मामलों में मनमानी करते रहे। कभी टेंडर की वित्तीय बोली समय पर नहीं खोली तो कभी तकनीकी बोली। यहां तक कि टेंडर के आवंटित होने के बावजूद अवार्ड ऑफ कॉन्ट्रेक्ट (एओसी) को ऑनलाइन अपलोड नहीं किया जाता था। अब जब टेंडर प्रक्रिया पर विजिलेंस की नजर पड़ी है तो 13 साल पुराने टेंडर के भी एओसी अपलोड होने लगे हैं।
बता दें कि एओसी में टेंडर किस ठेकेदार को कितने में मिला है और उसे कहां क्या-क्या काम करना है जैसी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां होती हैं। मुख्य विजिलेंस ऑफिसर कम प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने प्रशासन और नगर निगम में लगाए जा रहे टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ियों की शिकायत पर मंगलवार को एक बैठक की थी। इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों को इस बैठक की भनक पहले ही लग गई और इसके बाद से मई के पहले हफ्ते में एकाएक नए और पुराने टेंडरों के एओसी वेबसाइट पर अपलोड होने लगे।
11 अप्रैल 2023 से लेकर 11 मई 2023 के बीच एक माह में कुल 871 टेंडर के एओसी अपलोड किए गए हैं। इसी अवधि में 11 अप्रैल 2022 से 11 मई 2022 के बीच सिर्फ 195 एओसी अपलोड किए गए लेकिन मई 2023 के पहले 11 दिनों में कुल 267 एओसी अपलोड हो चुके हैं। आजकल रोजाना 20 से 25 एओसी अपलोड हो रहे हैं। इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों में डर का माहौल इस कदर है कि वह कई साल पहले हो चुके टेंडर की एओसी अब अपलोड कर रहे हैं। कुछ जल्दबाजी में स्कैन कॉपी के बजाय मोबाइल से ही फोटो खींच कर एओसी अपलोड कर दे रहे हैं तो कुछ जांच से बचने के लिए एओसी की जगह सादे कागज पर यह लिखकर उसे अपलोड कर रहे हैं कि ''एल-1 को काम आवंटित कर दिया गया''। हालांकि नियमों के तहत यह भी गलत है।
13 साल पहले 25.18 लाख में हुआ था काम, तीन मई को अपलोड हुआ एओसी
प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग के पब्लिक हेल्थ सर्किल पीएच डिवीजन-7 ने नवंबर 2010 में सेक्टर-50 के सरकारी हाईस्कूल में 25.18 लाख में कई काम कराए थे। इसकी एओसी तीन मई 2023 को अपलोड की गई। इसी डिवीजन ने वर्ष 2011 में सेक्टर-36 और सेक्टर-42 के डिवाइडिंग सड़क पर पाइपों का 38.44 लाख रुपये में काम कराया था। इसकी एओसी भी तीन मई 2023 को अपलोड की गई है। अधिकारियों को एओसी अपलोड करने की जल्दी इस कदर है कि ईई पीएच-7 ने एक सादे कागज पर ही लिख कर अपलोड कर दिया है कि एल-1 एजेंसी ने बैंक गारंटी जमा कर दी है इसलिए उसे काम आवंटित कर दिया गया है। इस पर अधिकारी के डिजिटल हस्ताक्षर भी हैं।
17 अप्रैल को मुख्य विजिलेंस ऑफिसर से की थी शिकायत
धनास निवासी अखिल बंसल ने ई-टेंडरिंग प्रक्रिया में नियम का पालन नहीं होने को लेकर 17 अप्रैल को मुख्य विजिलेंस ऑफिसर धर्मपाल को शिकायत दी थी। उन्होंने बताया था कि ई-टेंडरिंग में अधिकारी मनमर्जी कर रहे हैं। समय पर अवार्ड ऑफ कॉन्ट्रैक्ट अपलोड न करके लोगों से टेंडर की शर्तें व जानकारी छुपाने की कोशिश की जाती है। इससे भ्रष्टाचार बढ़ रहा है और अधिकारियों की मंशा पर भी सवाल खड़ा हो रहा है। उन्होंने कहा था कि पिछले कुछ समय में जितने भी टेंडर लगे हैं, उनकी विजिलेंस जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई लोगों के सामने आ सके।
यह है ई-टेंडरिंग की प्रक्रिया
ई-टेंडरिंग प्रक्रिया में पहले किसी भी काम के लिए चंडीगढ़ की ई-टेंडरिंग वेबसाइट पर https://etenders.chd.nic.in/nicgep/app पर तय समय के लिए टेंडर अपलोड किया जाता है। तय दिन टेंडर खुलता है। तीसरे चरण में तकनीकी बोली खुलती है। चौथे चरण में तकनीकी मूल्यांकन होता है। पांचवे चरण में वित्तीय बोली खुलती है और छठे चरण में उसका मूल्यांकन होता है। सातवें चरण में लोअर-1 का चयन होता है और आखिर में लोअर-1 की तरफ से बैंक गारंटी जमा कराने के बाद उसे अवार्ड ऑफ कॉन्ट्रैक्ट (एओसी) जारी होता है, जिसकी एक कॉपी ऑनलाइन भी अपलोड करनी होती है।
किसी का सुझाव आया था कि ई-टेंडरिंग प्रक्रिया की समीक्षा की जानी चाहिए क्योंकि कई टेंडर की समय पर वित्तीय या तकनीकी बोली नहीं खोली जा रही। एओसी अपलोड नहीं हो रहे। सुझाव के आधार पर ही समीक्षा की गई थी।
- यशपाल गर्ग, सचिव, विजिलेंस विभाग