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सिटी सेंटर घोटाला: विजिलेंस की क्लोजर रिपोर्ट को बैंस ने दी चुनौती

Sun, 17 Sep 2017 09:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना(पंजाब)
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- फोटो : Demo Photo
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बहुचर्चित सिटी सेंटर घोटाले में विजिलेंस ब्यूरो द्वारा मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को क्लीन चिट देकर अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने को लोक इंसाफ पार्टी के प्रधान एवं विधायक सिमरजीत सिंह बैंस ने चुनौती दी है।
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बैंस ने अपने वकील के माध्यम से शनिवार को सेशन जज गुरबीर सिंह की अदालत में पेश होकर इस केस को बंद नहीं करने के लिए आवेदन किया है। अदालत ने इस केस की अगली सुनवाई सात अक्तूबर को तय कर दी है। अदालत परिसर में पत्रकारों से बातचीत में विधायक बैंस ने कहा कि पंजाब की जनता के खून पसीने की कमाई को इस तरह बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा। अदालत से गुहार लगाई गई है कि इस केस को रेगुलर चलाया जाए। क्लोजर रिपोर्ट को मंजूरी न दी जाए और आरोपियों को कड़ी सजा दी जाए।

बैंस ने कहा कि विजिलेंस ब्यूरो ने पहले इस केस में 12 हजार पेज की चार्जशीट दायर की और अब क्लीन चिट दे दी। साफ है कि बादल और कैप्टन आपस में मिले हुए हैं। पहले बादल ने केस कमजोर किया और सत्ता संभालते ही कैप्टन अमरिंदर सिंह ने विजिलेंस ब्यूरो पर दबाव बनाकर क्लीन चिट की राह तैयार कर ली। बैंस ने साफ किया कि इस मामले में न्याय हासिल करने के लिए वे सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।
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बैंस ने की ये मांग

- फोटो : File Photo
बैंस ने आरोप लगाया कि विजिलेंस पुलिस सीएम सहित अन्य को बचाने की कोशिश कर रही है। यह मामला भ्रष्टाचार का है और आम जनता से जुड़ा हुआ है। उल्लेखनीय है कि विजिलेंस पुलिस ने कुछ दिन पहले ही कैप्टन अमरिंदर सिंह और अन्य के खिलाफ अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है। इसमें उन्होंने कैप्टन सहित अन्य आरोपियों को क्लीन चिट देते हुए कहा है कि जांच में आरोपियों के खिलाफ कोई भी आरोप साबित नहीं होता है।

बैंस ने बताया कि लुधियाना के पक्खोवाल रोड पर सिटी सेंटर के निर्माण को लेकर हुए 1144 करोड़ के घोटाले को लेकर विजिलेंस ने पिछले दिनों कैप्टन अमरिंदर सहित सभी आरोपियों को क्लीन चिट दे दी थी। जिला एवं सेशन जज की अदालत में एक अप्लीकेशन देकर केस को बंद करने की सिफारिश करते हुए क्लोजर रिपोर्ट फाइल की गई थी। जबकि पहले ही सिटी सेंटर प्रोजेक्ट बंद होने के कारण निर्माण कंपनी सुप्रीम कोर्ट में गई हुई है और जस्टिस लहोटी द्वारा कंपनी के हक में 2006 में 437 करोड़ का अवार्ड पास किया गया है। इस पर 18 प्रतिशत ब्याज लगने से यह राशि करीब 11 सौ करोड़ रुपये बनती है।

ऐसे में यदि कोर्ट विजिलेंस की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करती है तो न कैप्टन और न ही बादल को इसका कोई फर्क पड़ेगा। निर्माण कंपनी को पंजाब की जनता की खून पसीने की कमाई का टैक्स के रूप में जमा कराया हुआ पैसा खजाने में से चुकाना पड़ेगा। बैंस के वकील कंवर हरपाल सिंह ने कहा कि विजिलेंस ने यह मामला दबाव में आकर किया है और अब अदालत उनकी अर्जी पर सात अक्तूबर को विचार करेगी।  
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