विदेश भेजने के नाम पर 373 लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी के मामले में क्राइम ब्रांच और सेक्टर-3 थाना पुलिस ने जिला अदालत में चालान दायर कर दिया है। पुलिस ने सेक्टर-8 सी स्थित फॉरेन हॉरिजन कंसलटेंट के मालिक/डायरेक्टर अरविंद अस्हत (42), कंपनी की डायरेक्टर उसकी पत्नी तनीशा अस्हत (36) के अलावा दो कर्मचारियों जगत सिंह (29) निवासी मोहाली और गुरप्रीत सिंह (30) निवासी मनीमाजरा को आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 120बी (आपराधिक साजिश) और इमिग्रेशन एक्ट 1983 की धारा 10 और 24 के तहत आरोपी बनाया है।
करीब 1200 पेज के चालान में पुलिस ने कुल 40 सरकारी गवाह बनाए हैं। इनमें मुख्य गवाह और शिकायतकर्ताओं में शामिल लुधियाना निवासी रूपिंदर सिंह, हरप्रीत सिंह और राजेश कुमार शामिल हैं। इसके अलावा आईसीआईसीआई बैंक, ओरियंटल बैंक ऑफ कामर्स, पंजाब एंड सिंध बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, सेंट्रल बैंक, फेडरल बैंक के अधिकारियों और कर्मियों को भी सरकारी गवाह बनाया है। अन्य गवाहों में पंजाब और चंडीगढ़ के डिप्टी रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज डॉ. अफसर अली, तनीशा की गिरफ्तारी के आदेश जारी करने वाली ड्यूटी मजिस्ट्रेट नाजमीन सिंह भी शामिल हैं।
वहीं पुलिस के गवाहों में डीएसपी क्राइम अमराव सिंह और एसएचओ सेक्टर-3 इंस्पेक्टर पूनम दिलावरी के अलावा कई अन्य पुलिसकर्मी सरकारी गवाह हैं। वहीं अन्य 370 शिकायतकर्ताओं की फिलहाल पुलिस जांच कर रही है। बाद में उन्हें भी केस में गवाह बनाया जाएगा। इससे पहले करीब एक साल से फरार चल रहे आरोपी डायरेक्टर दंपति अरविंद और तनिशा को पुलिस ने इसी साल 26 अप्रैल को गिरफ्तार किया था। इससे पहले पुलिस ने 31 मार्च 2017 को आरोपी और कंपनी के कर्मी मनीमाजरा न्यू दर्शिनी बाग निवासी गुरप्रीत सिंह व नयागांव निवासी जगत सिंह को गिरफ्तार कर लिया था। वहीं मामले में पांच अन्य कर्मियों को अदालत से अग्रिम जमानत मिल गई थी। हालांकि इन पांचों के खिलाफ कोई सबूत न मिलने पर पुलिस ने उन्हें चालान में आरोपी नहीं बनाया है।
यह है मामला
मामले का खुलासा 31 मार्च 2017 को हुआ था। आरोपियों के खिलाफ लुधियाना के गांव ढांडरा निवासी रूपिंदर सिंह से तकरीबन पांच लाख रुपये ठगने की शिकायत दी थी। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया था कि अगस्त 2016 में उसकी पत्नी ने स्टडी वीजा पर आस्ट्रेलिया जाना था, उन्होंने सेक्टर-8सी स्थित फॉरेन हॉरिजन कंसलटेंट के मालिक अरविंद अस्हत, गुरप्रीत सिंह व जगत सिंह को 4 लाख 94 हजार रुपये दिए थे। यह सारी पेमेंट उन्होंने आरटीजीएस के जरिए दी थी लेकिन, काफी समय बीतने के बाद भी आरोपियों द्वारा उनकी पत्नी को न तो विदेश भेजा गया और न ही उनके पैसे लौटाए।
इसके बाद वह उनके सेक्टर-8 स्थित ऑफिस पहुंचे। कंपनी की ओर से उन्हें एक चेक दिया गया, लेकिन चेक बाउंस हो गया। उन्होंने फिर से कंपनी के मालिक अरविंद से बात की लेकिन, उन्हें कोई संतुष्ट जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस को दी थी। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर दो लोगों को गिरफ्तार किया था, लेकिन इस दौरान कुछ दिनों के भीतर ही पुलिस के पास 350 से अधिक शिकायतें पहुंच गईं। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पंजाब, हरियाणा व अन्य कई जगहों से वीजा लगवाने के लिए आने वाले लोगों से करोड़ों रुपये लिए हुए हैं।
इस तरह पुलिस के पास करीब 373 शिकायतें पहुंची थीं। इसके बाद से आरोपी फरार हो गए थे। केस की जांच के लिए पुलिस ने डीएसपी क्राइम और इंस्पेक्टर पूनम दिलावरी के नेतृत्व में स्पेशल जांच टीम (एसआईटी) बनाई थी। 26 अप्रैल को ही पुलिस ने आरोपी दंपति को मोहाली से गिरफ्तार किया था।