कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो)
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मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उत्तरी जोन में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की स्थापना पंजाब में करने के प्रस्ताव को मंजूरी देने पर केंद्र सरकार का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) को इंस्टीट्यूट के लिए जल्द ही 25 एकड़ जमीन सौंप देगी।
प्रधानमंत्री के साथ वीडियो कॉन्फ्रेसिंग से हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में कोविड के मामले बढ़ रहे हैं। आंकड़ा अब तक 24891 तक पहुंच गया है। अब तक 604 मौतें हो चुकी हैं। पंजाब 10 लाख (एक मिलियन) लोगों में से 23,000 कोरोना टेस्ट कर रहा है। यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत की अपेक्षा अधिक है।
अगले 15 दिनों में आरटी-पीसीआर टेस्ट 12000 से बढ़ाकर 20000 करने की योजना है। यह टेस्टिंग क्षमता और बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने प्रधानमंत्री से चंडीगढ़ और पंजाब में स्थित केंद्र सरकार की संस्थाओं को टेस्टिंग क्षमता बढ़ाने की अपील की। इसके बारे में वे पहले भी पीएम को पत्र लिख चुके हैं।
राज्य की 2.4 प्रतिशत मौत दर पर चिंता जाहिर करते हुए कैप्टन ने कहा कि चाहे पूरे भारत में एक मिलियन के पीछे होती मौतों की अपेक्षा यह कम है और मौतों के 91 प्रतिशत मामले सह-बीमारियों से संबंधित हैं लेकिन यह अब भी पड़ोसी राज्य हरियाणा की अपेक्षा अधिक हैं। उन्होंने कहा कि मरीज इलाज के लिए अस्पतालों में देरी से आ रहे हैं और 86 प्रतिशत मौतें ट्रशरी अस्पतालों में भी हो रही हैं।
कैप्टन ने बठिंडा में स्थित एम्स में कोविड टेस्टिंग और इलाज तुरंत शुरू करने की अपील की जबकि इस संस्था में ओपीडी पहले ही कार्यशील है। उन्होंने कहा कि कोविड का इलाज शुरू करने से दक्षिणी पंजाब के लोगों को सहायता मिलेगी। उन्होंने संगरूर स्थित पीजीआई सैटेलाइट सेंटर में विशेष तौर पर कोविड के इलाज के लिए बिस्तरों की क्षमता बढ़ाने की भी मांग की। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार को फिरोजपुर में स्वीकृत पीजीआई सैटेलाइट सेंटर का काम भी तुरंत शुरू करने की विनती की।