पंजाब के बाद उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में जाटों के विरोध का सामना कर रही भाजपा के लिए हरियाणा के जाटों ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। हरियाणा में आरक्षण व अन्य सात मांगों को लेकर पंद्रह दिन से धरनों पर डटे जाट आंदोलनकारी खट्टर सरकार की ओर से गठित पांच सदस्यीय वार्ता समिति में केंद्र सरकार का भी एक प्रतिनिधि चाहते हैं।
जाट आंदोलनकारियों का तर्क है कि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से जाट आरक्षण पर लगा स्टे हटने के बाद केंद्र सरकार उन्हें संविधान की नौवीं सूची में शामिल करने का पक्का आश्वासन दे।
मामला केंद्र स्तर का है, इसलिए हरियाणा सरकार की मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति इसे लेकर कोई वादा उनसे नहीं कर सकती। ऐसे में केंद्र सरकार का एक प्रतिनिधि समिति में जल्द शामिल किया जाए। शनिवार को पानीपत में समिति के साथ मांगों पर हुई चर्चा केदौरान भी अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने यह मांग उठाई है।