केंद्र ने गुरुवार को पंजाब की मांग को सिरे से दरकिनार करते हुए यह भी साफ कर दिया है कि कोयले की ढुलाई के लिए पंजाब को रेलवे से अतिरिक्त रैक नहीं मिल सकेंगे क्योंकि इससे अन्य राज्यों को दिक्कत आ सकती है। हालांकि ऊर्जा मंत्रालय ने आरएसआर रूट को अपनी मजबूरी साबित करते हुए यह सफाई भी दी है कि मंत्रालय किसी पोर्ट विशेष के जरिए ही ढुलाई अनिवार्य नहीं कर रहा बल्कि यह पंजाब का अधिकार है कि वह जिस पोर्ट के जरिए कोयला मंगा ले।
व्यस्त रेल रूट व रैक की कमी का दिया हवाला
ऊर्जा मंत्रालय का कहना है कि तीन मंत्रालयों (ऊर्जा, कोयला व रेलवे) के उप-समूह ने सभी रेल रूटों के जरिए पंजाब को अतिरिक्त रैक मुहैया कराने का सुझाव दिया है लेकिन रेलवे इस स्थिति में नहीं है कि वह अतिरिक्त रैक उपलब्ध करा सके। रेलवे का कहना है कि रेल रूटों की व्यस्तता और रैकों की कमी के चलते उसके लिए एमसीएल क्षेत्र में रेल रूट पर अतिरिक्त रैक मुहैया कराना संभव नहीं है। उधर, ऊर्जा मंत्रालय का यह भी कहना है कि पंजाब को पिछले साल कोयला खदानों से प्रति दिन 9.6 रेलवे रैक के जरिए कोयला सप्लाई किया गया था। इस साल रैक की कमी के बावजूद पंजाब को प्रति दिन 13.8 रेलवे रैक उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
यह है मामला
पंजाब अपने थर्मल प्लाटों में बिजली उत्पादन के लिए महानदी कोलफील्ड से कोयला खरीदता है। पिछले साल तक यह कोयला रेल व सड़क माध्यम से पंजाब लाया जाता रहा था। इस तरह ओडिशा की खदानों से पंजाब तक दूरी 1,830 किलोमीटर पड़ती है। इस साल बिजली मंत्रालय ने 30 नवंबर, 2022 को पंजाब सरकार को पत्र भेजकर, कोयले की ढुलाई सीधे रेल मार्ग के बजाय आरएसआर माध्यम से करने का आदेश दिया। इस पर पंजाब सरकार की ओर से, ढुलाई महंगी हो जाने और बिजली उत्पादन लागत बढ़ने का हवाला देते हुए केंद्र से सीधे रेल रूट से ही कोयला लाने का आग्रह किया, जिसे गुरुवार को केंद्र ने अस्वीकार कर दिया। अब आरएसआर रूट से कोयला खदान से निकालकर पारादीप बंदरगाह तक रेल के जरिए और उसके बाद श्रीलंका से गुजरने वाले जल मार्ग से समुद्री जहाज के जरिये दहेज व मुंद्रा पोर्ट तक लाया जाएगा।
यह पोर्ट अडानी ग्रुप संचालित कर रहा। इस पोर्ट से फिर कोयले को रेल पर लादकर पंजाब लाया जाएगा। इस तरह कोयले की ढुलाई का लागत 4350 रुपये (रेल से) से बढ़कर प्रति टन 6750 रुपये हो जाएगी और पंजाब में बिजली उत्पादन भी प्रति यूनिट 3.60 रुपये से बढ़कर पांच रुपये हो जाएगा। इसके अलावा 3-5 दिन में पहुंचने वाला कोयला 15-20 दिन में पहुंचेगा।