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Chandigarh: बाढ़ पीड़ितों को दोगुना मुआवजा देना चाहती है मान सरकार, केंद्र नियमों में छूट देने को तैयार नहीं

Thu, 31 Aug 2023 03:24 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पंजाब के मुख्य सचिव अनुराग वर्मा के अनुसार, राज्य सरकार के पास मुआवजा देने को फंड तो हैं, लेकिन केंद्र सरकार के नियमों के कारण उपयुक्त मुआवजा नहीं दिया जा सकता। इस कारण नियमों में बदलाव करने की जरूरत है।
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बाढ़ पीड़ितों से मिलने जाते सीएम भगवंत मान। - फोटो : फाइल
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के कारण पंजाब में 19 जिलों के 1500 से अधिक गांवों में आई बाढ़ के नुकसान की भरपाई के लिए अभियान तो शुरू कर दिया है लेकिन राज्य सरकार प्रभावितों को जितना मुआवजा देना चाह रही है, वह केंद्र सरकार के नियमों के चलते संभव नहीं हो पा रहा। 

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मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गत 15 अगस्त से बाढ़ प्रभावित किसानों को मुआवजा बांटना शुरू कर दिया है और यह भी दावा किया है कि सरकार के पास मुआवजे के रूप में बांटने के लिए पर्याप्त राशि है लेकिन केंद्र सरकार के नियमों के चलते राज्य सरकार के हाथ बंध गए हैं। सरकार फसली नुकसान के लिए किसानों को सिर्फ 1,86,12,63,020 रुपये भी मुआवजे के तौर पर जारी कर सकी है।

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हाल ही में राज्य में बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लेने पहुंची केंद्रीय टीम को राज्य सरकार ने लगभग 1500 करोड़ रुपये के नुकसान की जानकारी दी है। इससे पहले केंद्र ने बिना यूजेज रिपोर्ट के तहत प्रदेश के 218 करोड़ रुपये जारी किए गए थे। तब सरकार ने राहत कार्यों के तहत, बाढ़ में मारे गए लोगों के परिजनों को 4-4 लाख, मकान ढहने के लिए 1.20 लाख और दुधारू पशुओं के मारे जाने पर 37500 रुपये मुआवजा राशि तुरंत वितरित कर दी थी। लेकिन इसके साथ ही मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र सरकार को लिखे पत्र में, बाढ़ प्रभावितों को लिए मुआवजा राशि दोगुना करने के लिए नियमों में छूट देने की भी मांग की थी, जिस पर केंद्र सरकार ने कोई जवाब तो नहीं दिया, बल्कि किसानों को फसल बुवाई के समय बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई की अनुमति दे दी। हालांकि यह भी पहला मौका है जब किसानों को बुवाई के समय हुए नुकसान की भरपाई का फैसला लिया गया है, क्योंकि अब तक खड़ी फसलों को हुए नुकसान का ही मुआवजा दिया जाता रहा है।

पंजाब के मुख्य सचिव अनुराग वर्मा के अनुसार, राज्य सरकार के पास मुआवजा देने को फंड तो हैं, लेकिन केंद्र सरकार के नियमों के कारण उपयुक्त मुआवजा नहीं दिया जा सकता। इस कारण नियमों में बदलाव करने की जरूरत है। उधर, पंजाब आम आदमी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता मलविंदर सिंह कंग ने कहा कि राज्य सरकार के पास मुआवजा बांटने के लिए पर्याप्त फंड है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा 15 अगस्त को मुआवजा वितरण की शुरुआत करने के बाद इन दिनों राज्य के मंत्री अपने-अपने जिलों में मुआवजा राशि वितरित कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर केंद्र सरकार नियमों में ढील दे तो पंजाब सरकार को सूबे के प्रभावित लोगों की ओर अधिक मदद करने में आसानी होगी।

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किसान संगठनों ने की 50 हजार रुपये एकड़ मुआवजे की मांग
पंजाब के पांच किसान संगठनों- भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल), अखिल भारतीय किसान फेडरेशन, किसान संघर्ष कमेटी पंजाब, भारतीय किसान यूनियन (मानसा) और आजाद किसान संघर्ष ने बाढ़ से नष्ट हुए धान के लिए राज्य सरकार द्वारा 6800 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने के ऐलान को खारिज करते हुए इस फैसले को किसानों से भद्दा मजाक करार दिया है।
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बलबीर सिंह राजेवाल और प्रेम सिंह भंगू ने यहां एक संयुक्त बयान में कहा कि सरकार ने किसानों को हुए नुकसान को कम करके आंका है और पर्याप्त राहत प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार के साथ इस मुद्दे को प्रभावी ढंग से नहीं उठाया है। दूसरी बार धान रोपने के लिए किसानों को शारीरिक श्रम के अलावा भारी खर्च भी करना पड़ा। उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्य हरियाणा क्षतिग्रस्त धान के लिए 15,000 रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा दे रहा है, उन्होंने दोहराया कि क्षतिग्रस्त धान की फसल के लिए प्रति एकड़ 50,000 रुपये, जानमाल के नुकसान के लिए 10 लाख रुपये और प्रत्येक क्षतिग्रस्त घर के लिए 5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। 

इसके अलावा किसानों और खेत मजदूरों का पूरा कर्ज माफ किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि इन मांगों को प्रभावी ढंग से उठाने के लिए 4 सितंबर को जिला मुख्यालयों पर विशाल विरोध प्रदर्शन किया जाएगा, जहां उपायुक्तों के माध्यम से सरकार को मांग पत्र सौंपा जाएगा।

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