केंद्रीय मंत्री सोम प्रकाश ने दलित छात्रों के लिए केंद्रीय पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना में पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री व अधिकारियों द्वारा 63.91 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का मुद्दा उठाया था। उन्होंने केंद्र सरकार में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. थावर चंद गहलोत और पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को पत्र लिखकर कार्रवाई करने की मांग की थी।
केंद्रीय मंत्री सोम प्रकाश ने बताया कि इस घोटाले को लेकर थावर चंद गहलोत को पत्र लिखकर अवगत कराया कि इस घोटाले की जांच कर रहे अतिरिक्त मुख्य सचिव कृपा शंकर सरोज ने मुख्य सचिव विनी महाजन को सौंपी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि दलित छात्रों को मिलने वाली स्कॉलरशिप का पैसा पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री ने विभाग के निचले अधिकारियों की मिलीभगत से नियमों को दरकिनार करते हुए अपने चहेतों को बांटा है।
इसका संज्ञान लेते हुए मंत्री डॉ. थावर चंद गहलोत ने केंद्र सरकार में संयुक्त सचिव स्तर के दो अधिकारियों द्वारा विभागीय जांच का आदेश दिया है। मंत्री सोम प्रकाश ने बताया कि डॉ. गहलोत ने यकीन दिलाया है कि रिपोर्ट आने के पश्चात दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
केंद्र कर रहा संघीय ढांचे पर एक और हमला: कैप्टन
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं सशक्तीकरण मंत्रालय द्वारा राज्य सरकार से बिना सलाह किए और मुख्य सचिव की जांच रिपोर्ट की प्रतीक्षा किए बिना, कथित वजीफा घोटाले की जांच के आदेश देने का कड़ा विरोध किया है।
मुख्यमंत्री सोमवार को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री सोम प्रकाश के उस दावे पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे, जिसके अनुसार केंद्रीय मंत्री की शिकायत पर केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्रालय द्वारा विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। केंद्रीय मंत्री सोम प्रकाश के हवाले से यह कहा गया कि उन्होंने इस कथित घोटाले की तरफ केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्री थावर चंद गहलोत का ध्यान दिलाया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि यह सत्य है तो यह कदम भारतीय संवैधानिक राजनीति के संघीय ढांचे पर एक और हमला है। उन्होंने कहा कि इस कदम का मकसद राज्य सरकार की साख को नुकसान पहुंचाना है, जोकि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा सभी गैर भाजपा शासित राज्यों की सरकारों को कमजोर करने के एजेंडे का हिस्सा है। कैप्टन ने कहा कि उनकी सरकार भाजपा या उसके हिस्सेदार शिअद द्वारा बनाए जा रहे ऐसे ओछे दबाव के आगे नहीं झुकेगी।
घोटाले की शुरुआत 2015-17 में पिछली सरकार के समय हुई: कैप्टन
मुख्यमंत्री ने कहा कि कथित घोटाला, जिसमें जांच के आदेश दिए गए हैं, की शुरुआत 2015-2017 में अकाली-भाजपा के कार्यकाल के दौरान हुई थी। अगर केंद्र सरकार के विभाग की कथित जांच का मनोरथ इस मामले में भाजपा-अकाली दल के बुरे कामों को छिपाना है तो वह इसमें सफल नहीं होंगे।
कैप्टन ने कहा कि वास्तव में उनकी सरकार द्वारा किए गए ऑडिट के आदेशों के दौरान ही कुछ अनियमितताएं सामने आईं थीं, जो अब मुख्य सचिव की जांच का विषय है। विभाग को बीती सरकार के समय के दौरान मंजूर किए गए फंडों के अनुसार कुछ कॉलेजों को जो अदायगियां की गईं, उनमें अंतर और अनियमितताओं का पता लगा था, तब से ही उन्होंने विस्तार में जांच करने के आदेश दिए थे। उनकी तरफ से जांच के आदेश सरकार के विशेष नियमों और एकमात्र कानूनी विकल्प के अनुसार दिए गए थे।
राज्य से संबंधित मामले में केंद्रीय विभाग की बिना किसी सहमति के कोई भी जांच तर्कसंगत नहीं है। कैप्टन ने उस पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप को बंद करने की केंद्र सरकार की दलित विरोधी कार्रवाई की भी निंदा की, जो राज्य के लाखों गरीब एससी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए लाभ पहुंचाती थी।