सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, 28-29 जनवरी की रात को सिंघु बार्डर पर निहंगों ने एक वीडियो के जरिए भड़काऊ बयान जारी कर आरोप लगाया था कि सिंघु बार्डर पर किसानों के आंदोलन को ध्वस्त करने के लिए आरएसएस ने 28 जनवरी को अपने स्वयंसेवकों को भेजा था। प्रदर्शन स्थल को खाली कराने के किसी भी प्रयास के खिलाफ हिंसक रूप से प्रतिशोध लिया जाएगा।
निहंगों के बयान में आरएसएस प्रमुख को चेतावनी दी गई थी कि किसानों के प्रदर्शन स्थल पर आरएसएस के वॉलंटियर भेजने की कोई भी कोशिश हिंसा को बढ़ावा दे सकती है। पत्र में कहा गया है कि उक्त स्थिति को ध्यान में रखते हुए राज्य में आरएसएस प्रमुख की सुरक्षा की समीक्षा कर सभी उचित व आवश्यक कदम उठाए जाएं।
पंजाब में आरएसएस पर हमलों का है लंबा इतिहास
पंजाब में आतंकवाद के दौर से आरएसएस के नेता और वॉलंटियर आतंकियों और कट्टरपंथियों के निशाने पर रहे हैं। राज्य में इस समय आरएसएस की करीब 900 शाखाएं चलती हैं, जिनमें से 30 पाक सीमा के सटे जिलों में कार्यरत हैं।
प्रदेश में आरएसएस पर पहला बड़ा हमला आतंकवाद के दौर में, मोगा में 25 जून, 1989 को हुआ था। तब नेहरू पार्क (अब शहीदी पार्क) में आरएसएस की शाखा पर आतंकियों ने हमला कर 25 स्वयंसेवकों को मार डाला था। इसके बाद आरएसएस के नेताओं और अन्य हिंदू संगठनों के नेताओं की कड़ी सुरक्षा के दावों के बावजूद पंजाब में इन पर हमले होते रहे और नेताओं की हत्याएं जारी रहीं।
आरएसएस की ही एक शाखा राष्ट्रीय सिख संगत के तत्कालीन अध्यक्ष रुलदा सिंह की 29 जुलाई, 2009 को आतंकियों ने गोली मार कर हत्या कर दी। जनवरी 2016 में लुधियाना में आरएसएस के सचिव नरेश कुमार पर आतंकी हमला हुआ, लेकिन इस हमले में कोई नुकसान नहीं हुआ।
इस हमले का आरोप बब्बर खालसा इंटरनेशनल पर लगा, जिसके सात सदस्यों को पुलिस ने 26 सितंबर 2017 को लुधियाना से ही गिरफ्तार किया था। फरवरी 2016 में लुधियाना के किदवई नगर में आरएसएस शाखा पर फायरिंग हुई, लेकिन संयोगवश कोई कार्यकर्ता घायल नहीं हुआ। इनके अलावा पंजाब में कई हिंदू संगठनों के नेताओं पर भी लगातार आतंकी हमले होते रहे हैं।