चंडीगढ़ में पहली बार आजादी का जश्न साल 1967 में मनाया गया। इसके पीछे की वजह भी शानदार है। दरअसल, शहर को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिलने पर पहली बार 15 अगस्त 1967 में सेक्टर-17 स्थित परेड ग्राउंड में झंडा फहराया गया। एक नवंबर 1966 को ही पंजाब से हरियाणा बना था और शहर को यूटी का दर्जा मिला था। चंडीगढ़ में रहने वाले लोगों ने परेड ग्राउंड में झंडा फहराते हुए देखा।
आजादी का जश्न कई लोगों ने उसी दिन मनाया। शहर के मशहूर आयकर वकील रविंदर किशन का कहना है कि उस समय यूटी के पहले चीफ कमिश्नर एमएस रंधावा ने झंडा फहराया था। यूटी बनने के बाद आजादी का जश्न देखने की शहर के प्रतिष्ठित लोगों में काफी होड़ थी।
वह नजारा उन्हें आज भी याद है। लोगों ने इस समारोह में जाने के लिए नए कपड़े तक बनवाए थे। रविंदर किशन ने बताया कि 1947 में जब देश आजाद हुआ तो उस समय वह पंजाब के रायकोट में थे। उस समय उनकी आयु 6 साल की थी। लेकिन उस समय आजादी की इतनी खुशी नहीं थी जितना दहशत का माहौल था। लोगों ने अपनी तलवारें निकाल ली थी। घर की छत पर एक बड़ी कढ़ाई में तेल को लगातार गर्म किया जा रहा था ताकि अगर कोई हमला करता है तो उस तेल का इस्तेमाल किया जा सके। हर जगह से सूचनाएं आ रही थीं कि लोग मारे काटे जा रहे हैं। किशन ने बताया कि वह 1964 से चंडीगढ़ में रह रहे हैं।
नहर के एक ओर हिंदू-सिख दूसरी तरफ मुसलमान
इंटक के पूर्व अध्यक्ष एवं कांग्रेस के सीनियर नेता रामपाल शर्मा ने भी बताया कि 1966 में जब यूटी बना तो चंडीगढ़ के लोग काफी खुश थे लेकिन पंजाब के लोग यूटी बनने पर खुश नहीं थे। शर्मा ने बताया कि प्रशासन ने 1967 में पहला आजादी का जश्न परेड ग्राउंड में मनाया। उस समारोह में उन्होंने भी भाग लिया था। चीफ कमिश्नर एमएस रंधावा का शहर के विकास में अहम योगदान रहा है। 1954 को वह बटाला से चंडीगढ़ आए थे।
आजादी के समय 1947 में जश्न नहीं मनाया गया तब चारों तरफ कत्लेआम चल रहा था। उनके गांव पटोरी महांता में एक नहर थी। नहर के एक तरफ मुसलमान और दूसरी तरफ हिंदू और सिख थे। एक दूसरे को नहर भी पार नहीं करने दिया जा रहा था। उस समय एक बार जब यह घोषणा हुई कि गुरदासपुर एरिया पाकिस्तान में चला गया तो मुसलमान खुश हो गए लेकिन बाद में यह बात आई कि गुरदासपुर पाकिस्तान में नहीं गया तो कत्लेआम ज्यादा बढ़ गया।