पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने रोपड़ में खनन के स्थानों के पास निजी नाके लगाकर ट्रकों से अवैध वसूली में अधिकारियों की मिलीभगत की प्राथमिक जांच सीबीआई को सौंप दी है। न्यायालय ने सीबीआई को दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने यह आदेश चीफ जूडीशियल मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की काला चिट्ठा खोलने वाली रिपोर्ट देखने के बाद जारी किए हैं।
सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने कहा कि सीजेएम की रिपोर्ट देखने से यह साफ हो जाता है कि बिना सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत के यह काम संभव ही नहीं है। जिस कार्य को रोकने की जिम्मेदारी अधिकारियों पर है, वे उसी को प्रोत्साहन देने का काम कर रहे हैं। मामला बेहद गंभीर है और ऐसे में दोषियों पर कार्रवाई बेहद आवश्यक है, जिसके लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है। न्यायालय ने अब चंडीगढ़ सीबीआई के एसपी को सीजेएम की इस रिपोर्ट के आधार पर जांच करने के आदेश देते हुए सुनवाई 8 सितंबर तक स्थगित कर दी है।
रूपनगर सीजेएम की रिपोर्ट से हुआ था खुलासा
हाईकोर्ट के आदेश पर रूपनगर के सीजेएम हरसिमरनजीत सिंह ने अपनी पहचान छिपाकर मौके का दौरा किया था। उन्होंने जो पाया उसकी रिपोर्ट उच्च न्यायालय को सौंपी थी। रिपोर्ट के अनुसार सरकार का दावा था कि यहां माइनिंग साइट्स पर कोई अवैध चेक पॉइंट्स और बैरियर नहीं है। लेकिन दावा पूरी तरह गलत निकला।
रिपोर्ट में बताया गया कि यहां के पांच गांवों में ऐसे अवैध चेक पॉइंट्स हैं। कहीं किसी ढाबे में, कही सड़क के किनारे, कई जगह घरों, कहीं बिलकुल पुलिस पोस्ट के पास तो कही किसी दुकान में हैं। कोई भी ट्रक यहां से बिना दिए निकल नहीं सकता है। जो लोग यहां वसूली कर रहे हैं उन्हें सरकार द्वारा नियुक्त नहीं किया गया है। यह यहां के स्थानीय युवक ही हैं। जिन्हे बदले में 13 हजार रुपये मिलते हैं।