केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मंगलवार को मोहाली की अदालत में लुधियाना की एक निजी कंपनी और उसके तीन निदेशकों के अलावा वैधानिक लेखा परीक्षक और पंजाब स्थित दो समूह फर्मों के खिलाफ चालान पेश किया। मामला 1530.99 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी का है।
सीबीआई ने मेसर्स एसईएल टेक्सटाइल्स लिमिटेड के नीरज सलूजा (निदेशक), धीरज सलूजा (निदेशक), नवनीत गुप्ता (निदेशक), राम दास खन्ना (पार्टनर), मेसर्स दास खन्ना एंड कंपनी (एसईएल के वैधानिक लेखा परीक्षक) को आरोपी बनाया है। सभी पर छह अगस्त 2020 को बैंक धोखाधड़ी के आरोप में केस दर्ज किया गया था।
आरोप है कि एक निजी कंपनी और उसके निदेशकों सहित अन्य आरोपियों ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व में 10 बैंकों के कंसोर्टियम को धोखा देकर लगभग 1530.99 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की। आरोप के मुताबिक, अभियुक्तों ने अपने संबंधित पक्षों को बड़ी मात्रा में बैंक ऋण दिया गया और बाद में समायोजन प्रविष्टियां की गईं। अभियुक्तों ने कथित रूप से गैर-प्रतिष्ठित आपूर्तिकर्ताओं से मशीनरी की खरीद को दिखाया और इस तरह बिलों का चालान कर दिया।
सीसी लिमिट यानी स्टॉक, तैयार माल आदि के खिलाफ प्राथमिक सुरक्षा की बड़ी राशि को कथित रूप से बैंक के पैसे का दुरुपयोग करने के लिए अभियुक्तों द्वारा बेच दिया गया क्योंकि बेचे गए सामानों की बिक्री आय बैंक के पास जमा नहीं की गई थी। लुधियाना स्थित उक्त निजी कंपनी और पंजाब में मलोट, नवांशहर, नीमराना (राजस्थान) और हांसी (हरियाणा) में इसकी इकाइयां यार्न, कपड़े आदि के निर्माण के व्यवसाय में थीं।
इससे पहले 14 अगस्त, 2020 को आरोपियों के परिसरों में तलाशी ली गई थी जिसमें कई दस्तावेज बरामद हुए थे। इसके बाद आरोपियों के खिलाफ एलओसी नोटिस जारी किए गए थे। जांच के दौरान सीबीआई ने कई लोगों से पूछताछ की थी। निदेशकों में से एक नीरज सलूजा को गिरफ्तार कर लिया गया क्योंकि वह अपने जवाबों में टालमटोल कर रहा था। वह न्यायिक हिरासत में है। सीबीआई के मुताबिक आगे की जांच जारी है।