SDM East and Joint Commissioner of Municipal Corporation Shilpi Patar
- फोटो : File Photo
पचास हजार रुपये रिश्वत लेते सीबीआई द्वारा गिरफ्तार की गई एचसीएस और एसडीएस ईस्ट रहीं शिल्पी पात्रा की जमानत याचिका सीबीआई कोर्ट ने सुनवाई के बाद खारिज कर दी। इससे पहले अदालत में दोनों पक्षों में याचिका को लेकर लंबी बहस हुई। सीबीआई के वकील ने यह कहते हुए शिल्पी की जमानत का विरोध किया कि केस की जांच अभी चल रही है। ऐसे में अगर उन्हें जमानत मिली तो केस की जांच प्रभावित हो सकती हैं।
इससे पहले एचसीएस अफसर शिल्पी की ओर से दायर जमानत याचिका पर उनके वकील तरमिंदर सिंह ने दलील दी कि उसका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। सीबीआई को कैश उनके पास से रिकवर नहीं हुआ था। उन्हें केस में गलत गिरफ्तार किया गया है। साथ ही एसडीएम ने शोरूम को नियमों के तहत सील किया था। एक बार सील होने के बाद उनके पास अधिकारी नहीं है कि वह उसकी सील खुलवा सकें। इसलिए उनके द्वारा रिश्वत मांगने का सवाल ही नहीं उठता।
इस पर सरकारी वकील केपी सिंह ने दलील दी कि सीएफएसएल से आई हैंड वाश रिपोर्ट में शिल्पी और उसके पति दोनों के हाथ में केमिकल की पुष्टि हुई है। इसका साफ मतलब है कि दोनों ने रिश्वत की रकम को चेक किया था। इसके अलावा सीबीआई के पास मौजूद ऑडियो क्लिप में भी साफ है कि एससीएस ने रिश्वत की मांग की थी।