बाबा चरण सिंह की पत्नी इस मामले में 1994 में उच्च अदालत में याचिका दायर की थी। उच्च अदालत के आदेश पर यह मामला सीबीआई को सौंपा गया और सीबीआई ने 1998 में इस मामले में एफआईआर दर्ज की। जांच के बाद सीबीआई ने पांच चार्जशीट अदालत में दाखिल कीं। 2001 से 2019 तक यह मामला लंबित सूची में रहा। 10 मई 2019 को सर्वोच्च अदालत ने अपने एक आदेश में इस मामले का आठ महीने के भीतर निपटारा करने की हिदायत सीबीआई अदालत को दी। इसके बाद मोहाली की सीबीआई अदालत में शुरुआत हुई।
आरोपियों को पांच से लेकर दस साल तक की सुनाई सजा :
सीबीआई अदालत ने सबूतों के आधार पर दोनों पक्षों को सुनने के बाद बाबा चरण सिंह के अपहरण और हत्या के मामले में इंस्पेक्टर सूबा सिंह को 10 साल की सजा और 30 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। वहीं, केसर सिंह के अपहरण और हत्या के मामले में एसआई बिक्रमजीत सिंह व एसआई सुखदेव सिंह को भी 10-10 साल की सजा सुनाई गई है।
मेजा सिंह के अपहरण और हत्या के मामले में इंस्पेक्टर सूबे सिंह को 10 साल की सजा हुई जबकि सुखदेव राज जोशी को अपहरण का दोषी मानते हुए पांच साल की सजा सुनाई गई। गुरमीत सिंह व बलविंदर सिंह के अपहरण के लिए दोषी मानते हुए सुखदेव राज जोशी को पांच साल की सजा दी है।
वहीं यूपी के सीतापुर से गुरदेव सिंह को उठाए जाने के आरोपी गुरमीत सिंह को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया। इसके साथ ही बाबा चरण सिंह के अपहरण और हत्या में डीएसपी कश्मीर सिंह गिल व एसआई निर्मल सिंह के खिलाफ भी साक्ष्य न मिलने पर उन्हें बरी कर दिया गया। एएसआई सूबा सिंह और हेड कांस्टेबल लख सिंह को भी कोर्ट ने दोषी मानते हुए प्रोबेशन और 50 हजार रुपये जुर्माना जारी किया है।