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Chandigarh News: डेपुटेशन पर शिक्षकों की नियुक्ति पर कैट की शर्त

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20 फीसदी कोटे पर प्रशासन से तीन सप्ताह में मांगा जवाब, चयनित शिक्षकों की नियुक्ति याचिका के फैसले पर निर्भर
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पंजाब-हरियाणा से बुलाए जा रहे शिक्षकों की प्रक्रिया को चुनौती, स्थानीय कर्मचारियों ने पदोन्नति का अवसर देने की उठाई मांग

संवाद न्यूज एजेंसी
चंडीगढ़। यूटी चंडीगढ़ के शिक्षा विभाग में प्रिंसिपल, हेडमास्टर, लेक्चरर और टीजीटी शिक्षकों की डेपुटेशन पर नियुक्ति का मामला केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की चंडीगढ़ पीठ पहुंच गया है। कैट ने चयन प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है, लेकिन स्पष्ट किया है कि चयनित कर्मचारियों की नियुक्ति मूल याचिका के अंतिम फैसले के अधीन रहेगी। अधिकरण ने चंडीगढ़ प्रशासन को तीन सप्ताह में विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन को बताना होगा कि नियुक्तियों की प्रक्रिया निर्धारित 20 फीसदी डेपुटेशन कोटे के दायरे में है या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 को होगी।

स्थानीय शिक्षकों को पदोन्नति का अवसर देने की मांग
ज्वाइंट एक्शन कमेटी ऑफ टीचर्स, यूटी चंडीगढ़ ने प्रशासन के 30 जुलाई 2026 के पत्र को चुनौती दी है। इसके तहत पंजाब और हरियाणा से प्रिंसिपल, हेडमास्टर, लेक्चरर (पीजीटी) और मास्टर-मिस्ट्रेस (टीजीटी) पदों के लिए इच्छुक कर्मचारियों का पैनल मांगा गया था। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पात्र स्थानीय कर्मचारियों को पदोन्नति का अवसर दिए बिना दूसरे राज्यों से शिक्षक बुलाना नीतिगत निर्देशों के विपरीत है। कमेटी ने डेपुटेशन कोटे से जुड़ी 1991 और 1996 की अधिसूचनाओं को भी चुनौती दी है।
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2003, 2005 और 2008 से डेपुटेशन पर कर्मचारी
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, प्रशासन के निर्देशों में डेपुटेशन की अधिकतम अवधि तीन वर्ष है, लेकिन कई कर्मचारी लंबे समय से कार्यरत हैं। कैट ने रिकॉर्ड में पाया कि कुछ लेक्चरर, टीजीटी और जेबीटी शिक्षक 2003, 2005 और 2008 से डेपुटेशन पर हैं। कुछ लेक्चरर 2021 और 2022 में सेवानिवृत्त भी हो गए। अधिकरण ने इस मामले को डीओपीटी के 22 मार्च 2023 के कार्यालय ज्ञापन के संदर्भ में जांचने की बात कही।
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