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हरियाणा का रणः अब कास्ट वार में कूदे दिग्गज

Wed, 27 Aug 2014 01:18 PM IST
प्रवीण पाण्डेय/अमर उजाला, चंडीगढ़
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हरियाणा में सत्ता के सिंहासन तक पहुंचने के लिए राजनीतिक दलों ने जातीय गणित लगाना शुरू कर दिया है। जातीय चेहरों के आधार पर जीत का दावा कर रही पार्टियों को 36 बिरादरी को साथ लेकर चलना होगा। सभी जातियों को लुभाने के लिए पार्टियों ने होमवर्क शुरू कर दिया है।
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चुनाव को लेकर क्षेत्र के हिसाब से जातिगत समीकरणों पर पार्टियों ने जोर देना शुरू कर दिया है। अहीरवाल से जाट बहुल इलाकों तक मतदाताओं को लामबंद करने का काम शुरू कर दिया है। फिलहाल सभी दलों में मजबूत चेहरों ने जातिगत समीकरणों के आधार पर अपने जीतने वाले समर्थकों को टिकट दिलवाने के लिए पैरवी शुरू कर दी है।

इनमें जाट, पंजाबी, दलित, वैश्य, ओबीसी, ब्राह्मण, अहीर आदि मतदाता शामिल हैं। राजनीतिक दलों में इन जातियों का प्रतिनिधित्व करने वाले मजबूत नेता मौजूद हैं। बीते दोनों विधानसभा चुनाव में दलित और पंजाबी मतदाताओं ने एक दल का पूरा साथ दिया लेकिन लोकसभा चुनाव में पार्टी को उम्मीद के मुताबिक इन दोनों जातियों के मतदाताओं का समर्थन नहीं मिला।
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लिहाजा विधानसभा चुनाव में ने दोनों इन दोनों जातियों के अलावा अन्य सभी जातियों को साथ लेकर चलने के लिए रणनीति तैयार कर ली है। जाट और नॉन जाट की राजनीति पर केंद्रित हरियाणा विधानसभा चुनाव के महासमर में ऊंट किस करवट बैठेगा। यह मतदान के बाद पता चलेगा।

कांग्रेस में हर वर्ग के क्षत्रिय

कांग्रेस विधानसभा चुनाव हुड्डा के नेतृत्व में लड़ेगी। जाट नेता के तौर पर हुड्डा हरियाणा में स्थापित नेता हैं। इसके अलावा वे नॉन जाट नेताओं को भी अपने साथ लेकर चल रहे हैं। पिछले दो विधानसभा चुनाव में पार्टी को जीत दिलवा कर इस विधानसभा चुनाव में हैट्रिक के लिए ताल ठोक रहे हैं।

जाट नेता के तौर पर रणदीप सुरजेवाला का हरियाणा के अलावा राष्ट्रीय राजनीति में भी कद है। कांग्रेस ने दलितों को लुभाने के लिए डा. अशोक तंवर को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की कमान सौंपी है। विधानसभा चुनाव तंवर के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण हैं, जितना मुख्यमंत्री हुड्डा के लिए। दोनों नेताओं को तीसरी बार पार्टी को जिताने की जिम्मेवारी सौंपी गई हैं।

कांग्रेस में वैश्य नेताओं के तौर पर सावित्री और नवीन जिंदल दमदार नेता हैं, लेकिन दोनों नेताओं का प्रभाव उनके चुनाव क्षेत्र में अधिक है। हालांकि नवीन जिंदल इस बार का लोकसभा चुनाव हार गए हैं, लेकिन कांग्रेस के बड़े नेताओं के नाम में उनकी गिनती होती है।

सिख नेता के तौर पर कांग्रेस में मजबूत शख्सियत हरमोहिंद्र सिंह चट्ठा मौजूद हैं। हरियाणा की अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के मामले में चट्ठा ने अहम भूमिका निभाई है। कांग्रेस के पास अभी तक ब्राह्मण नेता के तौर पर विनोद शर्मा मौजूद थे लेकिन उनके जाने के बाद विधानसभा स्पीकर कुलदीप शर्मा कमान संभाल रहे हैं।

अहीरवाल से कैप्टन अजय सिंह यादव कांग्रेस में हैं, लेकिन वे समय समय पर आंखें दिखाते रहते हैं। पिछले दिनों वे मुख्यमंत्री से रूठ गए। जिन्हें पार्टी ने बाद में मना लिया। दलित नेता के तौर पर हरियाणा में पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं राज्यसभा सांसद कुमारी सैलजा का नाम भी बड़ा है।, लेकिन मुख्यमंत्री हुड्डा के साथ उनके रिश्ते जगजाहिर हैं।

हुडडा के नेतृत्व में चुनाव लड़ रही कांग्रेस में किन सीटों पर वे प्रचार के लिए जाएंगी यह देखने वाली बात होगी। हरियाणा सरकार में आबकारी एवं कराधान मंत्री किरण चौधरी कांग्रेस की तेज तर्रार नेता हैं। भिवानी में प्रमुख जाट नेताओं में उनकी गिनती होती है।

भाजपा में हर वर्ग के रसूखदार नेता

हरियाणा में पहली बार सत्ता का ख्वाब देख रही भाजपा जातीय चेहरों के दम पर चंडीगढ़ तक पहुंचना चाह रही है। पार्टी के पास जाट चेहरों की कमी नहीं है और अपने-अपने क्षेत्र में रसूख रखने वाले दलित नेताओं को पार्टी विभिन्न दलों से भाजपा में शामिल कर लिया है।

हरियाणा में भाजपा के पास ब्राह्मण नेता के तौर पर प्रो. रामबिलास शर्मा मौजूद हैं। पंजाबी नेता के तौर पर भाजपा में मनोहर लाल खट्टर और अनिल विज जैसे नेता हैं। खट्टर का संघ से पुराना जुड़ाव है। जबकि अनिल विज विधानसभा में अकेले ही कांग्रेस के साथ मोर्चा लेने में महारथ हासिल कर चुके हैं।

भाजपा में कैप्टन अभिमन्यु और ओम प्रकाश धनखड़ जैसे जाट चेहरे पहले ही मौजूद हैं। इसके अलावा हाल ही में भाजपा से हाथ मिलाने वाले कद्दावर जाट नेता बीरेंद्र सिंह का भी पार्टी पूरा लाभ लेगी। भाजपा में गुर्जर नेता के तौर पर फरीदाबाद से संसद के दरवाजे तक पहुंचे कृष्णपाल गुर्जर हैं।

वे मोदी के करीबी हैं और अपने क्षेत्र में उनकी अच्छी पैठ है। लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा का दामन थाम चुके राव इंद्रजीत अहीरवाल की राजनीति में चर्चित नाम हैं। अहीरवाल में उनकी पैठ का लाभ लेने में भाजपा नहीं चूकेगी।

इनेलो: टिकट वितरण में हर वर्ग का ध्यान

हरियाणा में प्रमुख विपक्षी दल इंडियन नेशनल लोकदल की अपनी अलग पहचान है। ताऊ देवीलाल की चौथी पीढ़ी भी लोकसभा तक पहुंच चुकी है। इनेलो ने टिकट वितरण में भी सभी जातियों को ध्यान में रखते हुए टिकट बांटे हैं।

हरियाणा की राजनीति में जाटों में अच्छी पैठ रखने वाला चौटाला परिवार का अपने आप में अलग वजूद है। इनेलो सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला के पुत्र एवं ऐलनाबाद से विधायक अभय चौटाला इस समय पार्टी की पूरी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

अशोक अरोड़ा को पार्टी ने पंजाबी चेहरे के तौर पर आगे किया है। इस समय इनेलो सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला की अनुपस्थिति में प्रदेश अध्यक्ष अशोक अरोड़ा कंधे से कंधा मिलाकर साथ चल रहे हैं। नेलो में दलित चेहरे के नाम पर अशोक शेरवाल सहित अन्य नेता हैं।

कांग्रेस छोड़ इनेलो में शामिल हुए पूर्व सांसद अवतार सिंह भड़ाना के शामिल होने से इनेलो को एक मजबूत गुर्जर नेता मिल गया है। पार्टी के पास मुस्लिम चेहरे के तौर पर जाकिर हुसैन बड़ा नाम है। लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने अच्छी लड़ाई लड़ी थी।
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बसपा का सोशल इंजीनियरिंग

दलित वोट बैंक के सहारे हरियाणा में अब तक डुगडगी बजाती रही बसपा इस बार उत्तर प्रदेश के फार्मूले सोशल इंजीनियरिंग पर चल रही है। दलित और ब्राह्मण गठजोड़ कर बसपा हरियाणा में नया सियासी इतिहास रचना चाह रही है।

जिसके लिए पार्टी ने ब्राह्मण नेता अरविंद शर्मा को मैदान में उतारा है। बसपा की सोशल इंजीनियरिंग में प्रदेश के कई अन्य नेता भी शामिल हो सकते हैं।

हरियाणा जनहित कांग्रेस:
हरियाणा में पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल के नाम पर गैर जाट के वोट इकट्ठे करने में जुटी हजकां का पूरा परिवार इस समय सक्रिय है। पार्टी में जाट चेहरे के तौर पर पूर्व सांसद और भजनलाल के करीबी रहे धर्मपाल मलि मौजूद हैं। जबकि पंजाबी चेहरे के नाम पर अमीर चंद मक्कड़ और दलित चेहरे के नाम पर लोकसभा चुनाव के समय शामिल हुए डा. सुशील इंदौरा मौजूद हैं।
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