सीजन में इन जिलों में सबसे ज्यादा जली पराली
- जिला मामले
- तरनतारन 2298
- पटियाला 1576
- संगरूर 1369
- अमृतसर 1318
- कपूपथला 856
दिवाली के बाद तेजी आई
पराली जलाने के मामलों में दिवाली के बाद से पंजाब में ज्यादा तेजी आई है। विशेषज्ञ इसका कारण धान की कटाई में आई तेजी को मानते हैं। एक अक्तूबर को भी 45, दो को 83, तीन को 75 मामले, चार को 65, पांच को 130, 6 को 85, सात को 62, आठ को 19, 9 को मात्र तीन केस, 10 को केवल चार मामले, 11 को 45, 12 अक्तूबर को 104, 13 अक्तूबर को 120, 14 को 82, 15 को 169, 16 को 206, 17 को 403, 18 को 342, 19 को 436, 20 को 96, 21 को 393, 22 को 582, 23 को 902, 24 अक्तूबर को दिवाली के दिन 1019, 25 अक्तूबर को 181, 26 अक्तूबर को 1238, 27 को 1111, 28 को 2067, 29 को 1898 और 30 अक्तूबर को 1761 पराली जलाने के मामले सामने आए।
किस जिले में कितना रहा वायु प्रदूषण
- जिला एक्यूआई श्रेणी
- लुधियाना 284 खराब
- अमृतसर 202 खराब
- जालंधर 178 मध्यम
- पटियाला 173 मध्यम
- खन्ना 171 मध्यम
बोर्ड की ओर से भरसक प्रयास जारी
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन डॉ. आदर्श पाल विग ने माना कि पंजाब में पराली जलाने के मामलों में वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी चीज में सुधार में कुछ समय तो लगता है। हालांकि बोर्ड की तरफ से किसानों को लगातार पराली न जलाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। साथ ही पराली न जलाने वाले किसानों को सम्मानित करके अन्य को भी इसके लिए प्रेरित करने की बड़ी कोशिश की गई है।
एक्यूआई के मानक
सीपीसीबी के अनुसार शून्य से 50 के बीच एक्यूआई के स्तर को ‘अच्छा’ और 51-100 के बीच को ‘संतोषजनक’ माना जाता है। इसके बाद 101-200 तक ‘मध्यम’, 201-300 तक ‘खराब’, 301-400 तक ‘बहुत खराब’ और 401-500 तक ‘गंभीर’ माना जाता है।