नरेंद्र का आरोप है कि बलराज ने अपने स्टाफ से एक डीड लिखवाई, जिसमें केवल 3 करोड़ 83 लाख रुपयों की देनदारी के बारे में लिखवाया। जब मैंने ऐतराज जताया तो कुंडू ने कहा कि वह तीन करोड़ 83 लाख रुपयों के लेन-देन के बारे में मीडिया और पंचायत के सामने कह चुका है। पूरी पेमेंट का मीडिया के समक्ष ब्योरा नहीं दिया जा सकता है। इससे छवि खराब होती है।
नरेंद्र ने कुंडू की बात मानते हुए मीडिया के सामने बयान दे दिए और डीड पर नरेंद्र व उसके भाई ने हस्ताक्षर कर दिए। नरेंद्र के मुताबिक, बलराज और शिवराज कुंडू ने कहा कि वे मार्च 2019 में सरकारी विभाग द्वारा दिया गया रोड रिपेयर का काम पूरा होने और सरकार की ओर से पेमेंट आने के बाद 3 करोड़ 83 लाख का चेक दे देंगे और बाकी की राशि को नकद देंगे। 31 मार्च 2019 को जब नरेंद्र ने फोन किया तो बलराज ने नहीं उठाया। कुछ समय बाद नरेंद्र के खाते में 44 हजार रुपये क्रेडिट हुए, जिस पर कुंडू ने उसका हिसाब क्लीयर होने की बात कही।
शिकायतकर्ता ने पांच सितंबर 2019 को शिकायत दी थी। इस पर जांच की गई। जांच में शामिल होने के लिए बलराज कुंडू को कई बार बुलाया गया, लेकिन वे शामिल नहीं हुए। दस दिन पहले महम विधायक जांच में शामिल हुए और अपने बयान दर्ज करवाए। दोनों पक्षों से पूछताछ के बाद धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है। - गोरखपाल राणा, डीएसपी मुख्यालय
फर्जी एफआईआर से भ्रष्टाचार के खिलाफ नहीं दबेगी आवाज: कुंडू
महम से निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू का कहना है कि धनखड़ बंधुओं के आरोप बेबुनियाद हैं। वे सार्वजनिक तौर पर मान चुके हैं कि उनका हिसाब-किताब हो चुका है। मैंने भ्रष्टाचार के खिलाफ जैसे ही आवाज उठाई, उसे दबाने के लिए मेरे व मेरे भाई के खिलाफ फर्जी केस दर्ज कराया गया है। ऐसा इसलिए किया गया ताकि दो दिन बाद होने वाले विधानसभा सत्र के दौरान मैं अपनी आवाज न मुखर कर सकूं, लेकिन इससे मेरी आवाज दबने वाली नहीं है।