चंडीगढ़। बच्चों की स्कूल फीस जमा नहीं करने पर सेक्टर-32 ए स्थित सॉपिंस स्कूल ने जिला अदालत में 250 अभिभावकों के खिलाफ केस दायर किया है। स्कूल की ओर से पेश एडवोकेट यादविंदर सिंह सैनी ने कहा कि अभिभावक स्कूल और पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के उस आदेश की अवहेलना कर रहे हैं, जिसमें अदालत ने आदेश दिया था कि अभिभावकों को फीस तो भरनी होगी। सैनी ने यह भी कहा कि सभी बच्चे ऑनलाइन कक्षा में आ रहे हैं, लेकिन अभिभावक फीस देने में आनाकानी कर रहे हैं।
इस मामले में स्कूल प्रबंधन का कहना कि उन्होंने अभिभावकों को नोटिस भेजकर फीस देने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने फीस नहीं दी। ऐसे में करीब दो करोड़ रुपये स्कूल फीस के बकाया हैं। कई विद्यार्थियों की फीस एक साल से लंबित है तो कइयों की छह महीने से। स्कूल की ओर से नवंबर 2020 से केस फाइल करने की शुरुआत की गई थी। कोरोना की वजह से कई अभिभावकों ने अपने बच्चों की स्कूल फीस जमा नहीं कराई है। इसी के चलते स्कूलों ने अभिभावकों के खिलाफ सख्ती कर दी है। इस मामले में अब अभिभावकों को अपना जवाब देना है। कोर्ट की ओर उन्हें नोटिस भेजा जाएगा।
क्या कहना है स्कूल प्रबंधन का
सॉपिंस स्कूल के निदेशक अमरबीर सिंह सिद्धू का कहना है कि स्कूल की तरफ से अभिभावकों को फीस जमा करवाने के लिए 20-25 बार नोटिस भेजकर फीस जमा करवाने को कहा गया था, लेकिन अभिभावकों की ओर से कोई रिस्पांस नहीं दिया गया। हम बिना फीस के स्कूल नहीं चला सकते हैं। शिक्षकों की तनख्वाह और अन्य खर्चे भी स्कूल को वहन करने हैं। हमारी अभिभावकों से गुजारिश है कि या तो फीस जमा करवाएं या लिखित में दें कि कब तक जमा करवा सकते हैं। स्कूल अभिभावकों को राहत देने के लिए एक बार की बजाय कई किस्तों में फीस लेने को भी तैयार हैं। बहुत से अभिभावकों ने पिछले एक साल की फीस नहीं दी है।
कोट
स्कूल अभिभावकों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन हम स्कूल के इस कदम से खुश हैं। अब हम स्कूल से कोर्ट में बैलेंस शीट और कुल खर्च की जानकारी लेंगे। स्कूल प्रबंधन का यह दांव उल्टा पड़ने वाला है। -नितिन गोयल, अध्यक्ष, अभिभावक संघ
क्या था सुप्रीम कोर्ट का आदेश, जिसे स्कूल ने आधार बनाया
सुप्रीम कोर्ट ने 8 फरवरी को राजस्थान के निजी स्कूलों की फीस के मामले में आदेश दिया था कि छात्र की कक्षाएं लगी हों या नहीं, उसे फीस का भुगतान करना ही होगा। बाद में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस आदेश को चंडीगढ़ सहित पंजाब व हरियाणा में लागू करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि फीस जमा नहीं करवाने पर भी स्कूल छात्र का ना तो नाम काट सकेंगे और न ही उन्हें परीक्षा में बैठने से रोक सकेंगे। इसके साथ ही हाईकोर्ट यह भी कहा था कि स्कूलों ने जो फीस सत्र 2019-20 में तय की थी, उन्हें 2020-21 के लिए भी उसी फीस का भुगतान लेना होगा। यह फीस देने में अभिभावकों को तकलीफ न हो इसलिए हाईकोर्ट ने 6 किस्तों में वसूलने का स्कूलों को आदेश दिया है। 5 मार्च से 5 अगस्त तक की किस्तों में स्कूल यह फीस वसूल सकेंगे। मुसीबत में फंसे अभिभावकों को आंशिक राहत देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि अगर किसी छात्र के अभिभावकों को फीस भरने में परेशानी है तो वह स्कूल को इस बारे में जानकारी दे सकते हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने स्कूलों को आदेश दिया है कि अगर उनके पास ऐसी कोई अर्जी आती है तो वह सहानुभूति दिखाते हुए उस पर निर्णय लें।