फर्म को 85 लाख का वर्क ऑर्डर देने के बदले 10.65 लाख रुपये घूस लेने के मामले में जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन डीसी एमएल कौशिक समेत चार लोगों पर केस दर्ज किया है। करीब एक माह पहले दर्ज इस एफआईआर को पुलिस ने भी दबाने का प्रयास किया। एमएल कौशिक फिलहाल सेकेंडरी एजुकेशन के डायरेक्टर के पद पर हैं।
डीएसपी भगवानदास की शिकायत पर थाना सिविल लाइन में तत्कालीन डीसी एमएल कौशिक समेत पीए सतीश कुमार, पीए एडीसी सुरेश शर्मा, कांट्रैक्टर राकेश गुप्ता के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत एफआईआर है। सभी के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र रचने के आरोप में भी केस दर्ज है। अमर उजाला के पास एफआईआर की कॉपी उपलब्ध है। डीसी हिसार रहते हुए एमएल कौशिक ने एक फर्म को 85.21 लाख रुपये का ऑर्डर दिया था। इस मामले में डीसी और उसके स्टाफ पर 10.50 लाख रुपये रिश्वत लेने का आरोप है। डीएसपी भगवानदास ने रिपोर्ट में कहा कि हांसी जेएमआईसी की अदालत ने आरोपी सतीश की आवाज के नमूने लेने के आदेश दिए थे। 1 अगस्त 2016 को सैंपल मधुबन लैब भेजे गए। लैब ने 3 फरवरी 2017 को पत्र क्रमांक 16 पीएचवाई-4804 के जरिये बताया कि सीडी और आवाज के सैंपल मैच कर रहे हैं।
इन धाराओं के तहत दर्ज हुआ मामला
डीएसपी भगवानदास ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि आईजी कार्यालय के पत्र क्रमांक 14630 दिनांक 4 जून 2014 , रपट नंबर 33 दिनांक 6 जून 2016 थाना हांसी शहर के मजमून से प्राप्त शिकायत के आधार पर की गई जांच में सैंपल का मिलान होने के बाद दोष सिद्ध पाया गया है। जिसके आधार पर धारा 7, 8,10, 12, 13-1डी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 49 और 120 बी के तहत केस दर्ज किया गया है।
कौशिक पर सरकार की ‘खास’ मेहरबानी
एचसीएस से पदोन्नत आईपीएस बने थे। कुछ महीने पहले कौशिक एजूकेशन डिपार्टमेंट से रिटायर हुए थे। प्रदेश सरकार ने उन्हें एक्सटेंशन देते हुए उसी पद पर दोबारा से नियुक्त कर दिया। रिटायरमेंट के बाद उसी पद पर नियुक्ति का प्रदेश में यह पहला मामला है।