कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बादल सरकार के खिलाफ ट्विटर पर जंग छेड़ दी है। साथ ही उन्होंने अरविंद केजरीवाल पर भी निशाना साधा। उन्होंने तीन ट्वीट कर अपने और अकालियों के कार्यकाल की तुलनात्मक रिपोर्ट पेश की है। आने वाले दिनों में उनके कुछ और ट्वीट आने की भी संभावना है।
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ट्विटर अब सियासी दलों के लिए डिजिटल बैटलफील्ड बन चुक है। इसी कड़ी में कैप्टन ने पंजाब दा कैंसर हैशटैग से ट्वीट करके अपने और अकालियों के कार्यकाल की तुलना की है। उन्होंने आंकड़ों के साथ बताया है कि अकालियों के कार्यकाल में एग्रीकल्चर और इंडस्ट्रियल ग्रोथ गिर गई। जबकि, पर-कैपिट-इनकम इंडेक्स में भी पंजाब काफी पिछड़ गया।
कैप्टन ने पहले ट्वीट में बताया है कि उनके कार्यकाल 2002-07 में इंडस्ट्रियल ग्रोथ 21.5 फीसदी थी। जबकि, बादलों के कार्यकाल में यह 2015 में गिर कर सिर्फ 2.1 प्रतिशत रह गई। एक अन्य पोस्ट के जरिए कैप्टन ने अपने और अकालियों के कार्यकाल में पर-कैपिटा-इनकम की तुलना की है।
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ट्वीट करके कार्यकाल का ब्यौरा दिया
कांग्रेस विधायकों के धरने में पहुंचे कैप्टन अमरिंदर सिंह
- फोटो : अमर उजाला
कैप्टन ने ट्वीट किया है कि उनके कार्यकाल में 2005-06 में पर-कैपिट-इनकम इंडेक्स में पंजाब देश में पांचवें स्थान पर था। जबकि, अकालियों के कार्यकाल में 2015-16 में गिरकर 16वें स्थान पर पहुंच गया। अपने आखिरी ट्वीट में कैप्टन ने एग्रीकल्चर ग्रोथ को लेकर अकालियों को घेरा है। उन्होंने लिखा है कि उनके कार्यकाल में एग्रीकल्चर ग्रोथ चार फीसदी थी, जोकि अकालियों के कार्यकाल में 2015 में गिर कर माइनस 0.75 फीसदी रह गई।
कैप्टन ने ट्विटर का सहारा सिर्फ अकालियों पर हमला बोलने के लिए नहीं लिया है। बल्कि, उनका मकसद अपना रिपोर्ट कार्ड पेश करना भी है, क्योंकि आज के ज्यादातर युवा ट्विटर पर हैं। वे युवा उनके कार्यकाल के समय छोटे थे। जिन्हें उनके कार्यकाल की उपलब्धियां नहीं पता हैं। इसलिए कैप्टन ट्विटर के जरिए उन युवा वोटरों को लुभाने की भी कवायद कर रहे हैं।
पहले छिड़ी थी केजरीवाल के साथ जंग
कुछ दिन पहले ट्विटर पर कैप्टन अमरिंदर सिंह और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय कनवीनर अरविंद केजरीवाल के बीच भी जंग छिड़ चुकी है। तब कैप्टन ने केजरीवाल को पंजाब के मुद्दों पर खुली बहस की चुनौती दी थी, लेकिन केजरीवाल ने उसे नकारते हुए कहा था कि वह सोनिया या राहुल गांधी से बहस को तैयार हैं। कैप्टन के साथ पंजाब के नेता बहस कर सकते हैं। ट्विटर पर दोनों की बहस काफी चर्चा का विषय बनी थी।
एसवाईएल पर देरी से आई केजरीवाल की प्रतिक्रिया
कैप्टन अमरिंदर सिंह
- फोटो : अमर उजाला
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एसवाईएल के मुद्दे पर अरविंद केजरीवाल के बयान को बहुत देरी से आई प्रतिक्त्रिस्या करार दिया है। उन्होंने इसे आप में भारी विद्रोह के चलते मौजूदा संकट व बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश बताया है। कैप्टन ने केजरीवाल द्वारा एसवाईएल मुद्दे पर लंबे वक्त तक उनकी चुप्पी के चलते खो चुके आधार को दोबारा हासिल करने हेतु देरी से किए गए प्रयास को असंगत व व्यर्थ बताया।
उन्होंने कहा कि बड़े स्तर पर नेताओं, वर्करों द्वारा पार्टी छोड़ने के साथ अब केजरीवाल की पार्टी पूरी तरह अव्यवस्था से घिर चुकी है, जो अब पंजाब की लड़ाई में कुछ हद तक दिखने के लिए घास-फूस की ओर देख रहे हैं। एसवाईएल पर केजरीवाल की टिप्पणी उस दिन आई जब आप के चार प्रमुख नेता कांग्रेस में शामिल हो गए। करीब डेढ़ सौ आप वॉलंटियर भ्रष्ट बैंस ब्रदर्स के साथ गठबंधन के चलते पार्टी छोड़ गए।
साफ जाहिर है कि केजरीवाल ने एसवाईएल पर बोलने का फैसला तब लिया जब उनकी पार्टी पूरी तरह से बुरे हालातों में घिर चुकी है। विधानसभा चुनाव में उनकी हार स्पष्ट नजर आ रही है। आप नेता की एसवआईएल पर टिप्पणी उनकी पार्टी द्वारा पंजाब में दलित डिप्टी सीएम नियुक्त करने के वादे की तरह अपनाया गया एक चुनावी हथकंडा है। जबकि, दिल्ली में उनकी अपनी कैबिनेट में एक भी दलित चेहरा नहीं है।
कैप्टन ने सवाल किया कि क्यों केजरीवाल को एसवाईएल पर टिप्पणी देने में एक माह का वक्त लग गया। कैप्टन ने कहा कि उन्होंने खुद पंजाब के लोगों के लिए इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर केजरीवाल को चुप्पी तोड़ने को कहा।
पर केजरीवाल ने प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया। ऐसे में केजरीवाल द्वारा एसवाईएल पर टिप्पणी जाहिर करने का समय उनकी सोच को संदेह के घेरे में ला देता है। केजरीवाल ने एसवआईएल पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले भी परस्पर विरोधी बयान दिए थे।
वह पहले दिन पंजाब के पक्ष में बोले, बाद में हरियाणा व दिल्ली का समर्थन करने लगे। केजरीवाल ने स्पष्ट कर दिया था कि उनकी सोच में पंजाब के लोगों के कल्याण का विचार आखिर में आता है। उनकी किसी भी तरह से सिर्फ राज्य में सत्ता हासिल करने में ही रुचि है। कैप्टन ने कहा कि गंभीर मुद्दों पर केजरीवाल के यू-टर्न पर अब हंसी भी नहीं आती है।