भाजपा के हेवी-वेट लीडर अरुण जेटली के खिलाफ कांग्रेस ने फायर-ब्रांड लीडर कैप्टन अमरिंदर सिंह को उतारने का फैसला किया है।
कैप्टन को अमृतसर से लड़ाने को लेकर दो दिनों से चल रहा असमंजस शुक्रवार शाम को खत्म हो गया। हाईकमान पहले ही कैप्टन को लड़ाने की पेशकश कर चुका था।
शुक्रवार शाम को कैप्टन के हां करते ही इस पर मुहर लगा दी गई। हालांकि सीट का औपचारिक ऐलान अभी नहीं हुआ है। कैप्टन और जेटली की जंग पर अब पूरे प्रदेश की नजर है।
बुधवार शाम को पार्टी हाईकमान ने कैप्टन को अमृतसर से चुनाव लड़ने को कहा था। रात को कैप्टन ने अहमद पटेल से मिल कर उन्हें साफ कर दिया था कि वह अमृतसर से चुनाव नहीं लड़ेंगे।
वीरवार सुबह कैप्टन ने एक चैनल पर बयान दिया कि अगर पार्टी प्रधान कहेंगी तो वह लड़ेंगे। दोपहर के समय कैप्टन ने जारी बयान में कहा कि वह अमृतसर से चुनाव नहीं लड़ सकते। क्योंकि बाहरी होने के कारण वह हलके के लोगों के साथ इंसाफ नहीं कर सकेंगे। अमृतसर से किसी स्थानीय नेता को लड़ाना चाहिए।
शुक्रवार शाम तक यही स्थिति बनी रही। सूत्रों के मुताबिक शाम को पार्टी प्रधान सोनिया गांधी ने कैप्टन को फोन करके कहा कि उन्हें चुनाव लड़ना चाहिए। जिसके बाद कैप्टन ने हामी भर दी। हाईकमान कभी भी उनकी उम्मीदवारी का औपचारिक ऐलान कर सकता है।
उधर, कैप्टन के लड़ने से अकाली-भाजपा गठबंधन को भी झटका लगा है। गठबंधन अभी तक अमृतसर को जीती हुई सीट मानकर चल रहा था। क्योंकि सिद्धू केबजाय जेटली के चुनाव मैदान में उतरने के बाद भाजपा की गुटबाजी और विरोध पर लगाम लग गया था। अकाली दल पूरी तरह जेटली के साथ था ही। अब कैप्टन के मैदान में उतरने के बाद चुनावी जंग दिलचस्प हो गई है।