पंजाब कांग्रेस में कैप्टन अमरिंदर सिंह और प्रताप सिंह बाजवा के बीच चल रही जंग थमने का नाम नहीं ले रही। पीपीसीसी के दो उपाध्यक्षों विधायक राणा गुरमीत सिंह सोढी और विधायक केवल सिंह ढिल्लों को अनुशासनात्मक कमेटी के नोटिस भेजे जाने से उपजे विवाद के बीच कैप्टन ने शनिवार को बाजवा पर गंभीर आरोप जड़ा है।
कैप्टन ने कहा कि पीपीसीसी अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा और उनके भाई फतेह जंग सिंह बाजवा ने लोकसभा चुनाव के दौरान अमृतसर में उनकी खिलाफत की। बाजवा बंधुओं ने उनके प्रचार के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की और शहर के विशेष दौरे करके लोगों को उनका विरोध करने को कहा। कैप्टन ने कहा कि इस क्रम में उन्होंने फतेह बाजवा को फोन कर अमृतसर में उनके विरोध में प्रचार के खिलाफ चेतावनी दी थी।
कैप्टन के अनुसार, वह पार्टी के हित में अभी तक चुप थे, लेकिन कुछ नेताओं को बिना कारण निशाना बनाए जाने और कोई गलती न होने के बावजूद आरोपी बनाए जाने के कारण उन्हें अब यह खुलासा करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। उन्होंने अनुशासनात्मक कार्रवाई कमेटी के चेयरमैन जीके चतरथ से सवाल किया है कि क्या वह प्रदेश कांग्रेस प्रधान व उसके भाई पर चुनाव प्रचार से छेड़खानी वाली हरकत के लिए कोई कार्रवाई करेंगे?
कैप्टन के आरोप
कैप्टन अमरिंदर ने एक बयान में कहा कि प्रचार के दौरान दोनों बाजवा भाई अमृतसर आए थे और उन्होंने लोगों से उनका (कैप्टन का) विरोध करने या फिर समर्थन न करने को कहा था। दोनों भाई ज्यादा समय अमृतसर में रहे। जबकि फोन पर फतेह ने कहा कि वह आराम कर रहे हैं और उनके भाई गुरदासपुर में हैं।
बाजपा भाइयों पर कार्रवाई होगी?
प्रदेश कांग्रेस की अनुशासनात्मक कमेटी के प्रमुख जीके चतरथ से कैप्टन अमरिंदर ने सवाल किया है कि क्या वे बाजवा भाइयों पर भी ऐसी कार्रवाई करेंगे, जो उन्होंने दो पीसीसी उपाध्यक्षों पर करने की कोशिश की है। पूर्व मुख्यमंत्री ने चतरथ को उस तर्क के आधार पर अपना बचाव न करने की हिदायत भी दी जिसमें चतरथ ने सवाल उठाया है कि 2004 में कैप्टन के मुख्यमंत्री रहते पंजाब में सिर्फ दो सीटें जीतने पर कैप्टन ने इस्तीफा क्यों नहीं दिया था? कैप्टन ने कहा कि अनुशासनात्मक कार्रवाई कमेटी के चेयरमैन ऐसे सवाल करके खुद पार्टी नहीं बन सकते।
लिखित शिकायत पर होगी जांच
पीपीसीसी की अनुशासन कमेटी के चेयरमैन जीके चतरथ ने कहा कि कैप्टन अमरिंदर अपने आरोप के संबंध में लिखित शिकायत दें, वह इसकी जांच करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वह किसी के अधीन नहीं हैं और पार्टी हाईकमान द्वारा सौंपी गई ड्यूटी निभा रहे हैं।
कोट
कैप्टन के आरोप निराधार हैं। पीपीसीसी अध्यक्ष बनने के लिए वह ऐसी बयानबाजी कर रहे हैं।