आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पंजाब प्रदेश कांग्रेस की नई कार्यकारिणी को हरी झंडी देकर प्रदेश कांग्रेस के कई नाराज गुटों को खुश करने की कोशिश की है।
प्रदेश अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह अपने करीबियों और विश्वासपात्रों को कार्यकारिणी में तरजीह दिलाने में कामयाब रहे हैं। 233 पदाधिकारियों वाली भारी-भरकम कार्यकारिणी में कुछ नाराज चेहरों को भी स्थान देकर संतुष्ट करने की कवायद की गई है।
एक शीर्ष कांग्रेस नेता का कहना है कि सभी को खुश किया गया। विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पार्टी किसी को नाराज करने का जोखिम नहीं उठाना चाहती है।
प्रताप सिंह बाजवा हों या फिर बीबी राजिंदर कौर भट्ठल व अन्य कांग्रेसी नेता, सभी के विश्वासपात्रों को कार्यकारिणी में बरकरार रखा गया, जो कमेटी में थे। यही कारण है कि बाजवा और भट्ठल समर्थक जिला अध्यक्षों को उनके पदों पर बरकरार रखने में कामयाब रहे।
विधानसभा में कांग्रेस के पूर्व नेता सुनील जाखड़ को प्रदेश कार्यकारिणी में मुख्य प्रवक्ता बनाकर उनकी नाराजगी दूर करने की कोशिश की गई है। उपाध्यक्षों की सूची में भी उन्हें पहला स्थान दिया गया है, जो काफी महत्व रखता है।
पार्टी में उनका एक अलग रुतबा है और उन्हें पहले राज्यसभा में भेजने की भी चर्चा हुई थी। उन्हें विधानसभा के नेता पद से हटाकर दलित नेता चरणजीत सिंह चन्नी को दिए जाने से जाखड़ पार्टी के शीर्ष नेताओं से नाराज भी थे। लेकिन अब उन्हें उपाध्यक्ष के साथ मुख्य प्रवक्ता बनाकर उनकी नाराजगी कम की गई है।
इसके अलावा प्रदेश कांग्रेस में अहम भूमिका निभाने वाले कैप्टन संदीप सिंह संधू को भी महासचिव बनाकर संतुष्ट करने का प्रयास किया गया। वर्तमान में प्रशांत किशोर चुनाव से पहले जो काम देख रहे हैं, वह पिछले चुनाव में कैप्टन संधू देखते थे। उनके स्थान पर प्रशांत को लाने से भी वह नाराज चल रहे थे।
पिछले दिनों कांग्रेस में शामिल होने वाले मनप्रीत सिंह बादल को प्रदेश कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष और उनके करीबी डॉ. नवजोत दाहिया को प्रवक्ता बनाया गया है, जो हाल ही में पार्टी में शामिल हुए थे।
कई पुराने कांग्रेसियों को पद देकर प्रदेश कांग्रेस पार्टी में नई जान फूंकने की कोशिश की गई है। प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद कैप्टन अमरिंदर ने कार्यकारिणी भंग कर दी थी। लंबे समय से नई कार्यकारिणी घोषित न किए जाने से पदाधिकारियों में उदासीनता आ गई थी।
इसके बाद शनिवार को कमेटी की घोषणा कर दी गई। कार्यकारिणी में कई ऐसे नाम नहीं है, जो लंबे समय से पदों को संभालते आ रहे हैं और आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट के प्रबल दावेदार भी हैं।
लुधियाना शहरी से गुरप्रीत गोगी को एकबार फिर जिला अध्यक्ष बनाया गया, जबकि पिछले दस साल से लुधियाना देहाती की कमान संभालने वाले मलकीत सिंह दाखा को प्रदेश कमेटी में उपाध्यक्ष बना दिया गया।
उनके स्थान पर एकबार फिर पुराने लुधियाना देहाती अध्यक्ष गुरदेव सिंह लापरां को कमान सौंपी गई है। कोटली परिवार से जुड़े तेज तर्रार नेता लखवीर सिंह लक्खा को एकबार फिर खन्ना जिला की कमान सौंपी गई है, जो पिछले विधानसभा चुनाव में दिग्गज अकाली नेता चरणजीत सिंह अटवाल से चंद मतों से पराजित हो गए थे।