योगी की टिप्पणी पर पलटवार करते हुए कैप्टन ने कहा कि योगी सरकार और भाजपा के सांप्रदायिक नफरत फैलाने के ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए ऐसी टिप्पणियां बेतुकी और बेबुनियाद हैं। कैप्टन ने कहा कि भाजपा खासकर उत्तर प्रदेश में योगी की विभाजनकारी नीतियों को सारी दुनिया जानती है। उत्तर प्रदेश में मुगल सराए का नाम पंडित दीन दयाल उपाध्याय नगर, इलाहाबाद का नाम प्रयागराज और फैजाबाद का नाम अयोध्या बदलने का जिक्र करते हुए कैप्टन ने इसे योगी सरकार द्वारा इतिहास को फिर से लिखने की कोशिश करार दिया।
हिंसा फैलाने वाली संस्था के संस्थापक हैं योगी : कैप्टन
मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कैप्टन ने याद दिलाया कि उत्तर प्रदेश लव जेहाद कानून को स्वीकृति देने वाला देश का पहला राज्य है। योगी की ताजमहल के प्रति खुली नफरत (जिसे वह मुगलों की विरासत मानते हैं) अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आलोचना का विषय रहा है। उन्होंने कहा कि दरअसल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कथित तौर पर हिंदु-युवा वाहिनी के संस्थापक हैं, जो गोरक्षा के नाम पर हिंसा फैलाने के लिए जिम्मेदार संस्था थी, जिसके नतीजे के तौर पर उनके अपने ही राज्य में मुसलमानों को अत्याचार सहना पड़ा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख का मालेरकोटला के बारे में ट्वीट एक भड़काऊ संकेत के अलावा और कुछ नहीं है। इसका उद्देश्य पंजाब में संपूर्ण एकजुटता के साथ रह रहे समुदायों में टकराव पैदा करना है। उन्होंने इसे भाजपा के पक्ष से विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में नफरत फैलाने की साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री यह भूल गए हैं कि उनके अपने राज्य में भी उसी समय चुनाव होने जा रहे हैं और हाल के पंचायती चुनावों के नतीजे संकेत देते हैं कि वहां भाजपा के राजनीतिक हालात हैरान करने वाले हैं।
नदियों में लाशें, अपना राज्य बचाएं योगी : कैप्टन
योगी को खुद का राज्य बचाने पर ध्यान लगाने की नसीहत देते हुए कैप्टन ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कोविड के हालात स्पष्ट तौर पर काबू से बाहर हैं और महामारी से पीड़ित लोगों की लाशें नदियों में फेंकी जा रही हैं। इस तरह मृत नागरिकों को सम्मान के साथ अंतिम संस्कार/दफन की रस्मों से वंचित रखा जा रहा है। कैप्टन ने कहा कि एक मुख्यमंत्री, जो अपने राज्य के लोगों के बुनियादी मानवाधिकारों की रक्षा भी नहीं कर सकता, जहां उनके साथ ऐसे शर्मनाक व्यवहार और अपमान के साथ पेश आने की आज्ञा दी जाती है, को अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।