रेलवे बोर्ड का कहना है कि राज्य में मालगाड़ियों के साथ ही यात्री ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनोद यादव ने शनिवार को दिल्ली में हुई एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ किया था कि रेलवे को यह नहीं बताया जाएगा कि कौन से ट्रैक पर कौन सी ट्रेन चलाई जाएगी। उन्होंने पंजाब सरकार से रेलवे ट्रैक और स्टेशन खाली करने का भी अनुरोध किया।
बोर्ड चेयरमैन ने कहा कि किसान आंदोलन के बीच बोर्ड ने 22 अक्तूबर को प्रयोग के तौर पर मालगाड़ियों का संचालन किया था लेकिन किसानों के ट्रैक पर होने के कारण एक बड़ी दुर्घटना होते-होते बची। उन्होंने कहा कि भारतीय रेल के लिए सुरक्षा सवोर्परि है। रेलवे ट्रैकों की जांच पड़ताल के बिना ट्रेनों का संचालन संभव नहीं है।
21 नवंबर तक मालगाड़ियां नहीं चलीं तो फिर ट्रैक पर बैठेंगे किसान
रेलवे बोर्ड द्वारा पंजाब में यात्री ट्रेनों के साथ ही मालगाड़ियों के चलाने की बात पर विवाद बढ़ने लगा है। फिरोजपुर में किसान-मजदूर संघर्ष कमेटी का कहना है कि यदि रेल प्रशासन मालगाड़ी नहीं चलाएगा तो 21 नवंबर के बाद किसान संगठन फिर से रेल ट्रैक पर धरने पर बैठ जाएंगी। कमेटी महासचिव सरवन सिंह पंधेर ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पंजाब की कमजोरी को अपना हथियार बना रही है।
पंजाब में मालगाड़ियां के चलाने के लिए किसान रेलवे ट्रैक खाली करने की बात कह रहे हैं, जबकि केंद्र मालगाड़ियों के साथ यात्री ट्रेनें भी चलाने की जिद पर अड़ा है। अगर रवैये में बदलाव नहीं आया तो दीपावली के सीजन में पंजाब के व्यापारियों के साथ आम जनता को भी काफी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।
‘रेल ट्रैक खाली कराने में कैप्टन विफल, 15 जगह ट्रैक अभी भी बाधित’
पंजाब भाजपा अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने रविवार को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को पत्र लिखकर रेलवे ट्रैक अभी भी खाली नहीं होने पर अफसोस प्रकट किया है। उन्होंने लिखा है कि राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारियों से भाग रही है, जिस कारण सूबे में 15 स्थानों पर अभी भी रेल ट्रैक बाधित है।
अश्विनी शर्मा ने पत्र में पंजाब में रेल यातायात बाधित होने के लिए कैप्टन को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि किसानों को त्योहारों के मौसम में रेलगाड़ियों को नहीं चलने देने के लिए उकसाकर प्रदेश की जनता के साथ कैप्टन दोहरी राजनीति कर रहे हैं। अश्वनी शर्मा ने कहा कि रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि राज्य सरकार द्वारा रेलवे पटरियों को साफ व सुरक्षित करने के आश्वासन के बाद रेलवे सेवाएं फिर से शुरू करने को तैयार है लेकिन कैप्टन अपने निजी स्वार्थ के लिए प्रदेश का भविष्य दांव पर लगा कर जनविरोधी राजनीति कर रहे हैं। कांग्रेस सरकार माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का भी खुलेआम उल्लंघन कर रही है।