रेलवे की तरफ से बयान आने के बाद किसान संगठनों ने नई रणनीति का रविवार को एलान किया। संगठनों ने कहा कि केंद्र सरकार व रेल मंत्रालय ने अगर 18 नवंबर तक मालगाड़ियां नहीं चलाईं तो किसान अन्य राज्यों की दूध-पानी और बिजली आपूर्ति बाधित कर देंगे। बता दें कि रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनोद यादव ने शनिवार को दिल्ली में हुई वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि रेलवे को यह न बताया जाए कि कौन से ट्रैक पर कौन सी ट्रेन चलानी है।
उन्होंने मालगाड़ियों के साथ त्योहारों के मद्देनजर यात्री ट्रेनें भी चलाने की बात कही थी। इसके लिए रेलवे ने किसानों और पंजाब सरकार से ट्रैक की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। पंजाब में मालगाड़ियां न चलने से किसानों को दूसरे राज्यों से आने वाले यूरिया व कीटनाशक को लेकर परेशानी झेलनी पड़ रही है।
किसानों ने यूरिया व कीटनाशक के बिना ही गेहूं की बिजाई का एलान किया है। भारतीय किसान यूनियन कादियां के प्रधान जगसीर सिंह छीनीवाल, भारतीय किसान यूनियन फूल के नेता सुरजीत सिंह, क्रांतिकारी किसान यूनियन के नेता गुरतेज सिंह सहित अन्य किसान संगठनों के नेताओं ने कहा कि अगर केंद्र सरकार व रेल मंत्रालय 18 नवंबर तक मालगाड़ियां नहीं चलाता है तो किसान बड़े और लंबे संघर्ष को तैयार हैं।
किसानों को मालगाड़ी चलने व न चलने से कोई फर्क नहीं लेकिन व्यापारी वर्ग को नुकसान झेलना पड़ रहा है। किसान बिना यूरिया व कीटनाशक ही गेहूं की बिजाई कर अपनी आने वाली पीढ़ी को जहर से बचाएंगे। किसान यूनियन कादियां के प्रधान जगसीर सिंह छीनीवाल ने बताया कि रेलवे ने 13 नवंबर तक मालगाड़ियों के संचालन की बात कही है।
अगर मालगाड़ियां नहीं चलाईं तो वह अन्य सभी किसान संगठन बैठक कर 18 नवंबर के बाद पंजाब से होने वाली पानी, बिजली व दूध की सप्लाई अन्य राज्यों को नहीं होने देंगे। इसके अलावा पंजाब के किसान देश के 565 किसान संगठनों के साथ 26 व 27 नवंबर को दिल्ली की ओर कूच कर कृषि कानून रद्द करने के लिए केंद्र सरकार को मजबूर करेंगे। आरपीएफ चौकी बरनाला की प्रभारी सब इंस्पेक्टर बबीता कुमारी ने कहा कि रेलवे के आदेश के मुताबिक मालगाड़ी चलाने में किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए पुख्ता प्रबंध किए जाएंगे।