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पूर्व क्रिकेटर यशपाल शर्मा का निधन: कैप्टन अमरिंदर सिंह ने जताया शोक, कहा- महान बल्लेबाज को हर कोई याद कर रहा है

Tue, 13 Jul 2021 10:41 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पूर्व क्रिकेटर यशपाल शर्मा का जन्म पंजाब के लुधियाना में हुआ था। मूलरूप से उनका परिवार हिमाचल प्रदेश का रहने वाला था। रोजगार की तलाश में पिता लुधियाना में आकर बस गए थे। मंगलवार यशपाल शर्मा के निधन पर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और खेल मंत्री राणा गुरमीत सिंह सोढी ने गहरा दुख प्रकट किया।
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कैप्टन अमरिंदर सिंह। (फाइल फोटो) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पूर्व क्रिकेटर यशपाल शर्मा (66) के निधन पर गहरा दुख प्रकट किया है। यशपाल शर्मा का मंगलवार को नई दिल्ली में दिल का दौरा पड़ने के कारण देहांत हो गया। उनके परिवार में पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा है। अपने शोक संदेश में मुख्यमंत्री ने यशपाल शर्मा को एक महान क्रिकेटर बताया, जो उस भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा थे, जिसने 1983 में विश्व कप जीत कर इतिहास रचा था।

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कैप्टन ने कहा कि धरती के इस पुत्र के चले जाने से आज हर देश निवासी खास कर हर पंजाबी उस महान बल्लेबाज को याद कर रहा है, जो भारतीय क्रिकेट टीम के राष्ट्रीय चयनकर्ता भी रहे हैं। पूर्व क्रिकेटर के परिवार, सगे-संबंधियों, दोस्तों और प्रशंसकों के साथ दुख साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने परमात्मा के आगे दिवंगत आत्मा की आत्मिक शांति और परिवार को ईश्वरीय आदेश मानने का बल प्रदान करने की अरदास की।

खेल मंत्री राणा सोढी ने भी जताया दुख 
पंजाब के खेल एवं युवक सेवाएं मंत्री राणा गुरमीत सिंह सोढी ने भारतीय क्रिकेटर यशपाल शर्मा के निधन पर गहरा दुख प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि यशपाल शर्मा की खेल विरासत का पंजाब के साथ एक गहरा रिश्ता रहा है।  अपने शोक संदेश में राणा सोढी ने कहा कि 70 और 80 के दशक के दौरान मध्यक्रम के धमाकेदार बल्लेबाज शर्मा ने अपनी तरफ सबसे पहले ध्यान तब आकर्षित किया जब उन्होंने 1972 में जम्मू-कश्मीर स्कूल्स के विरुद्ध खेलते हुए पंजाब स्कूल्स के लिए 260 रन बनाए। दो सालों के अंदर-अंदर वह राज्य की टीम में आ गए और उत्तरी जोन की टीम के सदस्य बने और इसी टीम ने तब विजय हजारे ट्रॉफी जीती। 
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राणा सोढी ने दुखी परिवार, सगे-संबंधियों और मित्रों के साथ दिली हमदर्दी साझा करते हुए परमात्मा के समक्ष अरदास की है कि वह इस दुख की घड़ी में इस अपूरणीय क्षति को सहने का बल और दिवंगत आत्मा को अपने चरणों में स्थान प्रदान करें।

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